संशोधित मास्टर प्लान तो राजधानी के बाशिंदों के लिए आफत बना ही हुआ है, जोनल प्लान की राह भी इसकी खामियों में उलझ गई है। पिछले पांच साल में कागजों और मौके पर हालात बदल चुके हैं। ऐसे में एमडीडीए के लिए जोनल प्लान जारी करना आसान नहीं होगा।
एमडीडीए ने हैदराबाद की एक कंपनी से जोनल प्लान के लिए वर्ष 2009 में सर्वे कराया था। सर्वे में 2008 के मास्टर प्लान में 250 से अधिक खामियां सामने आई थीं। खामियों को दूर करने के लिए दिसंबर 2011 में मास्टर प्लान संशोधित करने का आदेश हुआ, लेकिन शासन और नगर एवं ग्राम्य नियोजन विभाग ने नया मास्टर प्लान पेश कर दिया।
प्लान में बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में ऐसी-ऐसी गड़बड़ियां की गई हैं कि आम आदमी की आफत बढ़ गई है। ऐसे में जोनल प्लान के लिए नए सिरे से सर्वे की जरूरत पड़ेगी। एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम ने भी स्वीकार किया कि जोनल प्लान के लिए नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। इसमें कम से कम छह माह का वक्त लगेगा।
यह है जोनल प्लान
मास्टर प्लान जारी होने के बाद एमडीडीए शहर को विभिन्न जोन में बांटकर वहां विकास कार्य और अन्य योजनाएं तैयार करता है। जारी प्लान में शहर को नौ जोन में बांटा गया है। इनमें से आठ एक्टिव और एक साइलेंट रखा गया है।