‘वो हर रोज मुझे फोन करती थी। पूछती, बाबा दवाई खा ली? कभी ना कहता तो पहले डांटती फिर समझाने लगती। उसने पूरा घर संभाला। छोटे भाइयों को पढ़ाया, मेरी पूरी देखरेख की। लंबे संघर्ष के बाद घर खड़ा हुआ तो वह चली गई। बेटी नहीं, वो मेरा बेटा था साहब। अब मुझे दवा कौन खिलाएगा...।’
यह कहते-कहते हरिद्वार निवासी रामआसरे यादव का गला रूंध गया। वह गश खाने लगे। साथ आए बेटे ने उन्हें किसी तरह संभाला।
बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन में बेटी कांस्टेबल नीलिमा यादव की शहादत पर आए यादव सीएम के हाथों चेक लेते ही आंसुओं में फट पड़े। 16 जून की रात केदारघाटी में बरपे कुदरत के कहर ने परिवार का सहारा खत्म कर दिया। दून निवासी शहीद कांस्टेबल अभिषेक गुडियाल की बुजुर्ग मां हेमलता तो यह मानने को ही तैयार नहीं कि उनका लाडला अब दुनिया में नहीं रहा।
सीएम भी भावुक नजर आए
मां ने कहा ‘मेरा बेटा अब भी मिल तो सकता है’ तो सीएम विजय बहुगुणा भी भावुक नजर आए। हेमलता ने बताया कि 16 जून को अभिषेक ने फोन कर बताया कि उसे केदारनाथ भेजा गया है। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला।
वर्ष 2012 में उत्तरकाशी में आई बाढ़ में बहे दून निवासी फायरमैन दीपक कुमार की पत्नी सुषमा देवी तीन साल की मासूम बिटिया को लेकर आई थी।
वह रोती रही, तो नन्ही बेटी बार-बार पूछती ‘मां, रो क्यों रही हो?’ पर सुषमा भला उसे क्या जवाब देती। पूर्ण सिंह और रुक्मिणी की बेटी कांस्टेबल कल्पना आर्य भी केदारघाटी में आपदा से जंग करते शहीद हो गई। बोले, उसकी याद में रोते हुए अब आगे जीना है।
पूरा पुलिस फोर्स शहीदों के परिजनों के साथ है। हमें उनके भविष्य की पूरी चिंता है। ये सभी परिवार आगे भी पुलिस परिवार का हिस्सा बने रहेंगे।
-सत्यव्रत, डीजीपी
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