सीमा पर शहीद नायक पीवी जोशी की पत्नी शांति जोशी ने 35 साल तक कम पेंशन मिलने के कारण रानीखेत के किराए के मकान में जीवन व्यतीत किया। उसने स्वेटर बुनकर अपने तीन बच्चों को पढ़ाया और उनकी शादी दी। 35 साल बाद जाकर शांति जोशी को पूरी पेंशन मिल पाई। पेंशन के साथ एरियर पाकर शांति जोशी अब खुश है और कहा कि अब दुख के दिन दूर होंगे।
अल्मोड़ा जिले के सिरोनिया की मूल निवासी शांति जोशी ने बताया कि उनके पति पठानकोट सेना में नायक के पद पर तैनात थे। सात फरवरी 1982 को वह हवाई जहाज से लेह जा रहे थे। पठानकोट से 50 किमी दूर जाने पर हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में उनके पति सहित 33 लोग मारे गए।
पति के शहीद होने पर उसने ससुराल छोड़ दिया था। जेठ माधवानंद ने उनको रानीखेत में किराए का कमरा दिलवाया। मायके में माता-पिता और भाई की मौत हो चुकी थी। उस समय पेंशन मात्र 370 रुपये मिलती थी। थोड़ी पेंशन और तीन बच्चों का खर्च जीवन पर भारी पड़ रहा था। वह एक स्वेटर बुनकर सात रुपये हासिल करती थीं। स्वेटर बुनकर उसने बड़ी बेटी पुष्पा जोशी को ग्रेजुएट तक पढ़ाया।
बड़ा बेटा संजय जोशी कम पढ़ा, लेकिन छोटे बेटे प्रदीप जोशी ने एमएससी तक पढ़ाया। जैसे-तैसे उसने तीनों बच्चों की शादी की। इस बीच पेंशन की रकम भी बढ़ गई। 2004 में उसने मित्र बिहार कालोनी डहरिया में जमीन लेकर मकान बनवाया। दो साल पहले कैंटीन में उसकी मुलाकात उमा नामक महिला से हुई। उसने पासबुक देखकर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय जाने को कहा। यहां सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने कागजात देखने के बाद विशेष पेंशन दिलाने का वादा किया। मार्च की पेंशन उसे बढ़कर 23 हजार 56 रुपये मिली। इसके अलावा एरियर भी मिला है।
डेढ़ साल बाद मिल पाई सफलता
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर (रि) बीएस रौतेला ने बताया कि शांति जोशी के कागजात देखने के बाद उन्होंने चार बार यूबीआई से संपर्क किया। आरटीआई के तहत पत्राचार किया। लगातार प्रयास करने से डेढ़ साल बाद सफलता मिल गई। एक वीरांगना को उसका हक दिलाकर काफी खुशी हुई है।