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उत्तराखंड में दागी अफसर को दंड के बजाए मिली महत्वपूर्ण तैनाती

Fri, 14 Apr 2017 11:06 AM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून 
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ऑफिस - फोटो : demo pics
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समाज कल्याण विभाग के आईटी सेल का जिम्मा एक ऐसे अफसर को सौंप दिया गया है, जिसके खिलाफ तमाम जांचें चल रही हैं। यहां तक कि विजिलेंस विभाग उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तक के निर्देश दे चुका था। ऐसे में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के दस्तावेज में भी छेड़छाड़ की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
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समाज कल्याण विभाग के आईटी सेल में बतौर सहायक निदेशक तैनात रहे कांति राम जोशी को गुरुवार के दिन इस पद से हटाते हुए जिला समाज कल्याण स्तर के अधिकारी अनुराग शंखधर को तैनात कर दिया गया है। गौरतलब है कि डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले को उजागर करने में जोशी की अहम भूमिका थी।

वहीं अनुराग शंखधर पर अलग-अलग समय पर कई आरोप लगे हैं। अक्तूबर-2015 में सचिव भूपिंदर कौर औलख ने हरिद्वार में तैनाती के दौरान शंखधर द्वारा 6909 पेंशनधारकों के खाते में सीधे पैसा भेजने के बजाए उनके नाम पर चेक बनवाने के मामले में उन्हें आरोप पत्र देने के निर्देश दिए थे।
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हैरानी की बात यह भी है कि जनजातीय कल्याण में तैनात रहे अधिकारी को समाज कल्याण में तैनात किए जाने पर भी विवाद हुआ था, जिस पर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने उन्हें मूल विभाग में भेजने के भी आदेश दिए थे। मगर तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से इस पर रोक लगवा दी थी।

इसी क्रम में हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान शंखधर के खिलाफ विजिलेंस विभाग ने वर्ष-2013 में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश शासन को की थी, मगर आज तक मामले में कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा देहरादून में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए शंखधर को बिना चयन समिति के अनुमोदन के स्वत: रोजगार योजना और टर्म लोन योजना के दो बड़े ऋण स्वीकृत करने का भी दोषी पाया गया था। मामला पकड़ में आया लेकिन शंखधर का बाल भी बांका नहीं हुआ।

इसके अतिरिक्त चमोली में तैनाती के लिए शंखधर ने एक सामुदायिक भवन का निर्माण बिना वन विभाग की अनुमति के करा दिया। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी बीएस गर्ब्याल ने शंखधर समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ साढ़े छह लाख की रिकवरी के आदेश दिए थे। बाद में इस मामले में भी कोई रिकवरी नहीं हुई। इतना सब होने के बावजूद उन्हें सहायक निदेशक के पद पर तैनात किया गया है। 

95 फीसदी घपला तीन जिलों में
गौरतलब है कि छात्रवृत्ति घोटाले की कुल राशि में देहरादून के अलावा ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में 95 फीसदी राशि का घोटाला हुआ है। जिस अवधि में यह घोटाला हुआ है, उस वक्त उन अफसरों की तैनाती इन जगहों पर रही है, जो अब देहरादून में तैनात किए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो समाज कल्याण विभाग के कंप्यूटरों पर मौजूद डेटा बेस में बीते वर्षों में जारी छात्रवृत्ति का पूरा हिसाब-किताब है, जिसमें बड़े आराम से घपला पकड़ा जा सकता है। सूत्रों की मानें तो आईटी सेल में तैनात ज्यादातर कर्मचारी संविदा पर हैं। ऐसे में इन्हें आसानी से दबाव में लेकर खेल किया जा सकता है। यदि यह डेटा गायब होता है तो फिर छात्रवृत्ति घपले की जांच संपन्न कर पाना संभव नहीं है।

आनन-फानन में तैनाती पर उठ रहे सवाल
गुरुवार को अनुराग शंखधर को आईटी सेल में नोडल अफसर बनाने के आदेश आनन-फानन में जारी किए गए। ई-मेल पर आए इस आदेश पर शंखधर ने मेल से ही योगदान आख्या भी दे दी। हैरानी की बात यह है कि ऐसा तब हुआ, जब मौजूदा नोडल अफसर कांति राम जोशी को रिलीव ही नहीं किया गया। शासन की यह जल्दबाजी भरी कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है।

आज के वक्त में मेरे विरुद्ध कोई जांच लंबित नहीं हैं। जिन मामलों में मुझसे जवाब मांगे गए थे, वो मैं दे चुका हूं। जहां तक पोस्टिंग का सवाल है, वह शासन ने की है। आनन-फानन में ज्वाइन कराने की वजह शासन ही बता सकता है।
- अनुराग शंखधर, नोडल अफसर (आईटी सेल)

मैंने किसी व्यक्ति विशेष को तैनात करने के आदेश नहीं दिए हैं। यदि रुटीन में किसी ऐसे अफसर की तैनाती की फाइल साइन हुई है, जो विवादित है तो मैं उसे अवश्य हटाऊंगा।
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- यशपाल आर्य, कैबिनेट मंत्री (समाज कल्याण विभाग)
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