जम्मू में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हुए प्रकाश चंद कुमाईं का पार्थिव शरीर सोमवार को गांव पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े। वीर सैनिक के अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। देवल में स्थित पैतृक घाट पर सेना के जवानों ने सलामी दी।
जम्मू में शहीद हुए प्रकाश का तिरंगे पर लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। एक माह पहले ही ड्यूटी पर गए बेटे का शव देखकर मां-पिता और भाई-बहनों के साथ ही शहीद की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। लोग किसी तरह उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन शादी के सवा दो माह में ही मांग का सिंदूर मिटने पर कल्पना बेहोशी की हालत में पहुंच गई।
जवान बेटे की शहादत पर जहां हर किसी की आंखों में आंसू थे, वहीं बेटे के देश के लिए शहीद होने पर गौरवान्वित भी हो रहे थे। बताया गया कि वर्ष 2012 में 6 मैकेनाइज्ड इनफेंट्री में भर्ती हुए जवान प्रकाश चंद (28) पुत्र खुशाल सिंह निवासी ग्राम स्वाड़ी (कांडी) ब्लॉक जाखणीधार टिहरी गढ़वाल को 12 आरआर रेजीमेंट में दो साल की तैनाती दी गई थी, जो इन दिनों जम्मू स्थित रामवन के किलागजपत में तैनात थे।
शनिवार 24 दिसंबर को वह सुबह साढ़े दस बजे पेट्रोलिंग पर थे। इस दौरान पहाड़ी से भारी भूधंसाव हो गया, जिससे वह 150 फीट गहरी खाई में गिर गए और पहाड़ी से गिरा एक पत्थर उनके सिर पर लग गया। साथी जवानों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान जवान ने दम तोड़ दिया। सेना के जवान सोमवार सुबह पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। जहां अंतिम दर्शन के बाद उनके पैतृक घाट देवल में जवानों ने सलामी देकर अंतिम विदाई दी।
शहीद की शव यात्रा में पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, दुग्ध संघ अध्यक्ष पदम सिंह कुमाईं, भिलंगना प्रमुख विजय गुनसोला, पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं, धन सिंह नेगी, सीडीओ आशीष भटगाईं, एसडीएम सीएस चौहान, नायब तहसीलदार जगत सिंह धनोला, रमेश लाल, भगवान सिंह, राजेंद्र सिंह, मकान सिंह, भरत सिंह, कृपाल सिंह, खेम चंद, सोबन सिंह राणा, सोहन सिंह राणा, कुंवर सिंह राणा, राकेश कुमाईं सहित कई शामिल थे।