मातबर सिंह कंडारी के शहीद होने के बाद साल 2005 में भी जयकृत की माता मुन्नी देवी कंडारी का भी देहांत हो गया। इसके बाद जयकृत और उनकी दो बहनों का पालन पोषण दादा-दादी ने किया। जयकृत ने बताया कि दादी दादी के बुजुर्ग थे और आर्थिक स्थिति भी कुछ खास ठीक नहीं थी। चाचा के सहयोग से दोनों बहनों की शादी की गई। बड़ी बहन की शादी होने के बाद सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता की गई थी।
बहन ने पढ़ाया जयकृत को
माता और पिता के देहांत के बाद जयकृत की पढ़ाई का जिम्मा बड़ी बहन नीलम न उठाया। जयकृत ने बताया कि की माता-पिता के देहांत के बाद बहन नीलम नौकरी करने के लिए देहरादून आ गई। बहन ने नौकरी कर जयकृत को एक निजी कॉलेज से होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराया। अब जयकृत एक होटल में दस हजार रुपये की अस्थायी नौकरी करते हैं। जबकि बहन की शादी होने के बाद बहन अपने परिवार के साथ बेंगलुरू में रहती है।