फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ECBC के पालन के बिना पास नहीं होगा भवनों का नक्शा 

Sun, 25 Jun 2017 09:12 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
- फोटो : demo pic
विज्ञापन
उत्तराखंड में 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनने वाले भवनों के लिए ऊर्जा संरक्षण इमारत नियमावली (ईसीबीसी) का पालन करना अनिवार्य होने जा रहा है।
विज्ञापन


ईसीबीसी का अनुपालन नहीं करने पर भवनों का नक्शा पास नहीं होगा। उत्तराखंड देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां ईसीबीसी को नोटीफाइड किया जा चुका है। इसके अनुपालन के अब यह शर्त निर्धारित की जा रही है कि 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनने वाले भवनों का नक्शा तभी पास होगा, जब ईसीबीसी के मानदंडों का पालन किया गया होगा।

इसके लिए उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। अगर किसी न जैसे-तैसे नक्शा पास भी करवा लिया तो ईसीबीसी का पालन नहीं करने पर ऊर्जा कंपनियों को यह अधिकार होगा कि वह बिजली का कनेक्शन काट दें। 
विज्ञापन


नये बनने वाले भवनों के डिजाइन में बदलाव कर ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए प्रदेश में मई 2013 में ऊर्जा विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें कहा गया था कि निकाय क्षेत्र में 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनने वाले भवनों के लिए ईसीबीसी का पालन करना अनिवार्य होगा।

इस अधिसूचना के आधार पर आवास विभाग ने भी 2015 में अपनी नियमावली में इसे शामिल किया था। इससे बाद भी अभी तक इस पर कड़ाई से पालन नहीं हो रहा था। अब इसको लेकर व्यवस्था की जा रही है कि अगर 500 वर्ग मीटर से अधिक के कंडीशंड क्षेत्र में बनने वाले नये भवनों में ईसीबीसी के मानदंडों का पालन नहीं जाता है तो नक्शा पास नहीं होगा। प्रदेश में भवनों का नक्शा ऑनलाइन पास करने की जो व्यवस्था की जा रही है उसमें ईसीबीसी को लेकर भी शपथ पत्र की व्यवस्था होगी। ऊर्जा विभाग ने ईसीबीसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आर्किटेक्टस के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने की योजना बनाई है।

ऊर्जा संरक्षण इमारत नियमावली (ईसीबीसी) प्रदेश में पहले से नोटीफाइड है। अब इसका कड़ाई से पालन किया जाएगा। ईसीबीसी के अनुपालन के बिना 500 वर्गमीटर से अधिक के एरिया में बनने वाले भवनों का नक्शा पास नहीं होगा। ऑनलाइन नक्शा पास कराने के लिए ईसीबीसी को लेकर शपथ पत्र देने की व्यवस्था होगी। गलत शपथ पत्र देने की स्थिति में कार्रवाई भी होगी।  
विज्ञापन

- एके त्यागी, मुख्य परियोजना निदेशक, उरेडा 

ईसीबीसी के क्या हैं मानदंड 
-प्रस्तावित भवन में पानी गरम करने के लिए सोलर वाटर हीटर संयंत्र ही लगाया जाएगा।  
-सभी नये भवनों में बिजली के परंपरागत बल्ब, ट्यूब लाइट और पंखों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। 
-सभी भवनों में सीएफएल और ऊर्जा की बचत करने वाले उपकरण लगाए जाएंगे। 
-भवनों को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा की सूर्य की रोशनी अधिक से अधिक आ सके। 
-भवनों में दिन के समय ट्यूब लाइट और बल्ब का इस्तेमाल नहीं करना पड़े। 
-भवनों के खिड़की, दरवाजे और रोशनदान निर्धारित मानक के अनुरूप होंगे, ताकि रोशनी आ सके। 
-एसी का इस्तेमाल कमरे के साइज के मुताबिक किया जाए। 
-ईसीबीसी का पालन नहीं करने पर ऊर्जा कंपनियों को यह अधिकार है कि वह बिजली का कनेक्शन काट दे। 

क्या है लक्ष्य 
-राष्ट्रीय स्तर पर 2030 तक ऊर्जा के उपयोग में 50 फीसदी की कमी लाना।
-कार्बन के उत्सर्जन में 25 करोड़ टन की कमी लाना।
-बिजली की मांग में 15 हजार मेगावाट की कमी लाना। 
-इससे लगभग 35,000 करोड़ रुपये की होगी बचत। 
-प्रदेश में बिजली की खपत 12461 मिलियन यूनिट है, जिसमें 2022 तक 10 फीसदी कमी लाना है।
-नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों 1900 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति करना। 

केंद्र ने भी व्यावसायिक इमारतों के लिए ईसीबीसी को लाजिमी किया 
केंद्र सरकार ने देश भर में बनने वाली व्यावसायिक इमारतों के लिए ईसीबीसी को अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने 19 जून को नई दिल्ली में ईसीबीसी 2017 का शुभारंभ किया है। ईसीबीसी 2017 में निर्धारित मानकों के आधार पर ही देश भर में नई व्यावसायिक इमारतों का निर्माण किया जाएगा। ईसीबीसी को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और ऊर्जा क्षमता ब्यूरो (बीईई) ने तैयार किया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें