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डबल इंजन के जोर से दौड़ा उत्तराखंड, आठ महीने में आठ हजार करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

Fri, 09 Feb 2018 09:06 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
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इस भारी भरकम राशि से राज्य के विकास को पंख लगने तय
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धीमे ही सही मगर उत्तराखंड सधे कदमों के साथ आगे बढ़ रहा है। बीते नौ महीनों के भीतर डबल इंजन की ताकत का असर राज्य से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं में देखने को मिल रहा है।

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बात चाहें पीने के पानी की हो, उद्योगों की हो या फिर आपदा प्रबंधन और वनस्पति की। केंद्र सरकार से अब तक इन सेक्टर के लिए आठ हजार करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव पास हो चुके हैं। यही नहीं पर्यटन, उच्च शिक्षा, ऊर्जा और शहरी विकास से जुड़े लगभग चार हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट भी पास होने की कगार पर हैं। इस भारी भरकम राशि से राज्य के विकास को पंख लगने तय हैं।

पेयजल और सीवरेज से जुड़े दो अहम प्रस्तावों को बीते दिनों केंद्र ने मंजूरी दी है। नौ सौ करोड़ का एक प्रोजेक्ट अर्ध शहरी इलाकों के लिए है, जो वर्ल्ड बैंक की सहायता से संचालित किया जाएगा। वहीं दूसरा प्रोजेक्ट जर्मनी की कंपनियों के सहयोग से चलेगा। तेरह सौ करोड़ के लगभग का यह प्रोजेक्ट सीवरेज से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम करेंगी।
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हरिद्वार में हर की पैड़ी समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर झूलते बिजली के तारों से मुक्ति दिलाने के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग केे लिए 750 करोड़ के एक अहम प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दी है। इसके लिए ढाई सौ करोड़ रुपये की राशि जारी भी कर दी गई है। जल्द ही यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम अपने मुकाम तक पहुंचेगा।

सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योगों की बेहतरी के लिए सात सौ करोड़ का प्रस्ताव भी पास हो गया है। इस पैसे से इन उद्योगों को विभिन्न प्रकार की छूट और रियायतें देने के साथ ही अन्य सहायता प्रदान की जाएंगी। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां एमएसएमई सेक्टर को पनपाने की काफी संभावनाएं हैं।

आपदा प्रबंधन के लिए सात सौ करोड़, तकनीकि शिक्षा के लिए वर्क फोर्स डेवलपमेंट से जुड़ा चार सौ करोड़ के प्रस्ताव को भी केंद्र ने मंजूरी दे दी है। इसके अलावा स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और कृषि आदि से जुड़े करोड़ों के प्रस्तावों को केंद्र ने स्वीकृति प्रदान की है।

चार हजार करोड़ के प्रस्ताव पाइप लाइन में
टिहरी में पर्यटन विकास के लिए 1200 करोड़ और राज्य में रोपवे परियोजनाओं की स्थापना के लिए एक हजार करोड़ के पर्यटन विभाग के प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं। इसी प्रकार शहरों में अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करने के लिए एक हजार करोड़ का एक अहम प्रस्ताव, ट्रांसमिशन लाइनों को दुरुस्त करने और अंडरग्राउंड केबलिंग के लिए ऊर्जा विभाग का एक हजार करोड़ का प्रस्ताव, राज्य के महाविद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए नौ सौ करोड़ का उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव भी जल्द मंजूर होने की स्थिति में है।

राज्य स्तर पर भी बढ़ा बजट
केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार भी अपने स्तर से विभागों में जारी होने वाले बजट को बीस फीसदी तक बढ़ा चुकी है। एक अप्रैल-16 से 31 जनवरी-17 के बीच कुल बीस हजार करोड़ की रकम विभिन्न मदों में जारी की गई थी। इस साल इसी अवधि में यानी एक अप्रैल-17 से 31 जनवरी-18 के बीच चौबीस हजार करोड़ रुपये का बजट जारी किया जा चुका है। इसमें सबसे ज्यादा 4892 करोड़ रुपये शिक्षा, पीडब्ल्यूडी को 1517 करोड़, ग्रामीण विकास को 1457 करोड़, स्वास्थ्य को 811 करोड़, कृषि को 373 करोड़, पेयजल को 633 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। अभी वित्तीय वर्ष की समाप्ति को लगभग दो महीने शेष हैं। वित्त विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह आंकड़ा अभी कहीं ऊपर जाएगा।

डबल इंजन की ताकत का अहसास भरपूर हो रहा है। राज्य के विकास से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण कामों को केंद्र सरकार एक के बाद एक पास कर रही है। यह उत्तराखंड के लिए बहुत अच्छा संकेत है। जल्द ही कई और अहम चीजें निकलकर आने वाली हैं, जो न केवल पर्यटन, रोजगार बल्कि शिक्षा और कृषि केे क्षेत्र में अहम साबित होंगी।
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- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)

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