फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां की 'प्यास' को प्याऊ से बुझाएगी मनीषा

Thu, 04 Jun 2015 02:28 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
मां को मुखाग्नि देकर उनकी अंतिम इच्छा तो पूरी कर ली, लेकिन मनीषा दुखी थी। बीमारी की वजह से डॉक्टरों के मना करने पर वह अंतिम समय में भी मां के सूखे गले में दो घूंट पानी के नहीं डाल पाई।
विज्ञापन


बकौल मनीषा, मां पानी मांगती रही और मैं बेबस होकर देखती रही। यही बात बार-बार कचोट रही थी। तभी मन में आशा की एक नई किरण ने जन्म लिया। ...और मैंने ठान लिया। मां के नाम पर ट्रस्ट की स्थापना करूंगी और जगह-जगह प्याऊ लगवाऊंगी। ताकि किसी की प्यास अधूरी न रहे।

जीएमएस रोड के एकता एन्क्लेव में रहने वाली 17 वर्षीय मनीषा काफी समय से मां की देखभाल कर रही थी। मां कैंसर से पीड़ित थी। मनीषा पर छोटी बहन तनीषा की भी जिम्मेदारी थी। तनीषा अभी छठी कक्षा में पढ़ती है। मनीषा को मां मैत्री अरोड़ा हमेशा गुड़िया कहकर पुकारती थी।
विज्ञापन


अब मनीषा की आंखें यह सोचकर भर आती हैं कि कोई उसे गुड़िया नहीं पुकार रहा। मनीषा को इस बात का गम है कि आखिरी समय में मां को जब ग्लूकोज चढ़ रहा था, तो उस समय वह बार-बार पीने के लिए पानी मांग रही थी, लेकिन डॉक्टरों ने पानी देने से मना कर दिया।

रूंधे गले से मनीषा कहती है कि काश! मां को पानी दे पाती। अपने इस दुख को दूर करने के लिए अब वह मां के नाम से ट्रस्ट बनाकर जगह-जगह प्याऊ लगवाएगी। बताया कि मैंने मां की इच्छा का सम्मान करते हुए मुखाग्नि दी। पिता विनय अरोड़ा ने कहा कि मुझे भी बेटी ही मुखाग्नि देगी, तो मां को देने में क्या बुराई है? मनीषा बीबीए की पढ़ाई करके बिजनेस करना चाहती है।

रविवार को होगा यज्ञ और भोज
विनय अरोड़ा ने बताया कि रीति-रिवाजों से परे होकर हम लोग कोई चौथा या अन्य परंपरा नहीं करेंगे। रविवार के दिन लोगों के पास समय होता है। हम उसी दिन यज्ञ और ब्राह्मण भोज का आयोजन करेंगे, ताकि सभी लोग आ सकें।

बताया कि मां की मौत के बाद बच्चे जो भी खाते-पीते हैं, पहले मां की तस्वीर के सामने रखते हैं। हरिद्वार में अंतिम संस्कार सनातन धर्म और आर्य समाज दोनों तरीकों से किया गया। रविवार के दिन ही ट्रस्ट की भी स्थापना की जाएगी। जिसके माध्यम से पैसा जुटा मनीषा गरीबों को दान करेगी।

सब धर्मों पर विश्वास
मनीषा के मामा मनोज आर्य ने बताया कि बहन सभी धर्मों को मानती थी। वह साईं बाबा की पूजा करती थी। शनि देव के नाम की दीपक जलाती थी। मजार पर चादर चढ़ाती थी। गिरिजाघरों में प्रार्थनाएं करती थी। शबद कीर्तन करती थी। बेटी मनीषा ने बताया कि मां के बाद भी घर में यही माहौल रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें