देशभर में मानसून की रफ्तार को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि मानसून समय पर पहुंचेगा या नहीं। लेकिन इसके उल्ट कालसी स्थित डेयरी फार्म में अब जब चाहो तब बारिश होगी।
चौकिए मत...! कालसी स्थित पशु प्रजनन केंद्र (डेयरी फार्म) में अब सिंचाई के लिए कुछ इसी तरह के इंतजाम की तैयारी की जा रही है। इसके बाद सिंचाई के लिए प्रबंधन को न तो नहर की आवश्यकता होगी और न ही बारिश के लिए आसमान का मुंह ताकना होगा।
दरअलस, फार्म प्रबंधन इस साल केंद्र में रेन गन सिंचाई सिस्टम लगाने जा रहा है। जिसके बाद सिंचाई के लिए प्रबंधन जब चाहो बारिश की बौछारें पैदा कर सकेंगा। कालसी स्थित डेयरी फार्म करीब 80 एकड़ में फैला है।
जिसमें पशुओं के चारा उगाया जाता है। लेकिन अब तक सिंचाई के लिए फार्म के कर्मचारी या तो बारिश पर निर्भर थे या फिर नहर पर। ऐसे में कई बार सिंचाई नहर के प्रयोग को लेकर ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद तक की स्थिति पैदा हो जाती थी।
ऐसे में प्रबंधन रेन गन सिंचाई यंत्र से फसल की सिंचाई करने पर विचार कर रहा है। सिस्टम के शुरू होते ही फसलों पर इस तरह से पानी की बौछारें पड़ती है मानों बारिश हो रही हो।
30 मीटर होती हैं रेंज
फसलों की सिंचाई के लिए फार्म में रेन गन के दो सिस्टम लगाए जाएंगे। जिससे एक ही समय में 60 मीटर तक की दूरी पर फैली फसल की सिंचाई की जा सकेगी।
कम होगी खपत
अभी तक फसलों की सिंचाई के लिए प्रबंधन को सिंचाई नहर के साथ ही 10 हजार लीटर क्षमता के टैंक में पानी भरकर रखना पड़ता था। नहर में पानी न आने पर इसी टैंक के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जाती थी। रेन गन सिस्टम लगने के बाद पानी की खपत 10 गुना कम हो जाएगी। प्रबंधन इतनी ही क्षमता में करीब 10 एकड़ भू-भाग को सिंचित कर पाएगा।
फार्म में होती है यह फसलें
फार्म में चारा की मक्का, लोभिया, चरी, नैपियर घास, जई, बरसीन, बाजरा को बोया जाता है।
ज्यादा क्षेत्र में हो सकेगी कृषि
अभी तक नहर पर निर्भर होने के कारण क्यारी बनाकर चारा की खेती की जाती थी। जिसमें अधिक भूमि का इस्तेमाल नहीं हो पाता था। लेकिन सिस्टम के चालू होते ही क्यारी बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। जिससे फसल को उगाने के लिए ज्यादा जमीन का प्रयोग किया जा सकेगा।
फार्म में सिस्टम को लगाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। शीघ्र ही सिस्टम को लगाकर सिंचाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. प्रेम लाल, परियोजना निदेशक, कालसी डेयरी फार्म