मौसम के तेवर जिस तरह बदल रहे हैं ऐसे में फलों का राजा इस सीजन में ‘आम’ आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकता है।
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जिस तरह से बादल आए दिन बरस रहे हैं उससे पेड़ों में समय पर बौर नहीं आ सकी है जिस कारण उत्पादन में गिरावट की उम्मीद है।
50 प्रतिशत तक गिर सकता है उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों की माने तो इस बार उत्पादन 50-60 फीसदी तक प्रभावित हो सकता है। अमूमन आम के पेड़ में जनवरी अंत और फरवरी की शुरुआत में बौर आना शुरू हो जाती है लेकिन इस बार मार्च के अंत तक वातावरण में ठंडक बनने से आम के पेड़ों में बौर नहीं निकल सकी है। इससे बागवान परेशान हैं।
चौसा और बंबई ग्रीन की है धमक
दून की फल पट्टी के रूप में विख्यात पछवादून में 2083.73 हेक्टेयर भू भाग में आम की बागवानी की जाती है। जिसमें से अकेले 14.6.23 हेक्टेयर विकासनगर और 677.50 हेक्टेयर में उत्पादन सहसपुर ब्लाक में किया जाता है। यहां पैदा की जाने वाली वैरायटी में दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, चौसा, बंबई ग्रीन प्रमुख है।
रोग की भी पड़ रही है मार
आम के उत्पादन में गिरावट के लिए सिर्फ मौसम ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि फलों पर लगने वाला घुंडी रोग भी बराबर का दोषी है।
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इस बार बौर पर घुंडी रोग भी लगा हुआ है। अकेले इस रोग के कारण दस प्रतिशत का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।