राजधानी देहरादून में बारह एकड़ में सिमटा मालसी डियर पार्क अब 22 एकड़ में फैलेगा। इसे गढ़वाल मंडल का इकलौता चिड़ियाघर बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने पांच बाड़ों को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही मालसी डियर पार्क में वन्य जीव शोध केंद्र, अस्पताल और वाइल्ड लाइफ रेस्क्यु सेंटर का प्रस्ताव भी पास हो गया है। जुरासिक पार्क यहां का मुख्य आकर्षण होगा। पार्क के लिए कानपुर, दिल्ली और नैनीताल के चिड़ियाघर से जानवर मंगाए जा रहे हैं।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने मालसी डियर पार्क को वर्ष 2013 में चिड़ियाघर की मान्यता दे दी थी। इसके बाद यहां चिड़ियाघर के मानकों के लिहाज से कार्य चल रहा था।
कार्य के पूरा होते ही यहां पांच बाड़ों की डिजाइन को पास कर दिया गया है। एक बाड़े की डिजाइन में थोड़ी तब्दीली की जा रही है। जानवरों के लिए वन विभाग ने प्रस्ताव केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेज दिया है। डीएफओ पीके पात्रो ने बताया कि जुरासिक पार्क में फाइबर ग्लास के डायनासोर स्टाल किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि पार्क के चारों तरफ गुलदार रोधी बाड़ लगाई जाएगी। कानपुर, दिल्ली, नैनीताल के चिड़ियाघरों में जिन जानवरों की अधिकता होगी, उन्हें यहां लाया जाएगा। मालसी डियर पार्क के चिड़ियाघर बनने से बाहर से आने वाले पर्यटकों का मनोरंजन तो होगा ही राजधानी और आसपास के इलाकों के लोगों के सपरिवार घूमने के लिए स्थान हो जाएगा।
उपलब्ध पशु - पक्षी
गुलदार- दो
उल्लू- छह
बाज- छह
चीतल- 71
पाड़ा- 12
सांभर- दो
घुरल- चार
ये आएंगे
बाघ, दो भालू, लकड़बग्घा
- साल में मालसी पार्क आते हैं ढाई लाख टूरिस्ट
- साल में 40 लाख राजस्व मिलता है