प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने कसरत शुरू कर दी है।
एमडीडीए इसके लिए बिल्डरों की मदद लेगा। ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में गरीबों के लिए 35 फीसदी कोटा आरक्षित करने वाले बिल्डरों से प्राधिकरण डेवलपमेंट शुल्क नहीं लेगा। इसमें शेल्टर शुल्क, लेबर सेस से लेकर तमाम तरह की रियायत दी जाएगी।
25 जून 2015 से प्रधानमंत्री आवास योजना लागू हुई है। 2022 तक योजना में हर गरीब परिवार को मकान उपलब्ध कराना लक्ष्य है। योजना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। इसकी नियमित मानीटरिंग हो रही है। देहरादून में एमडीडीए के निर्माणाधीन प्रोजेक्टों में गरीबों के लिए ईडब्ल्यूएस का कोटा निर्धारित है। एमडीडीए के प्रोजेक्ट की तुलना में ईडब्ल्यूएस के लाभार्थियों की संख्या काफी अधिक है। शहरी विकास निदेशालय स्तर पर लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है।
एमडीडीए अधिक से अधिक गरीब परिवारों को छत मुहैया कराने के लिए बिल्डरों की मदद लेने जा रहा है। गरीबों के लिए मकान बनाने वाले बिल्डरों को सरकार की ओर से कई रियायतें दी जा रही हैं। एमडीडीए ने देहरादून के 20 बिल्डरों से वार्ता कर उन्हें प्रस्ताव दिया है।
यदि कोई बिल्डर अपने प्रोजेक्ट में 35 फीसदी कोटा गरीबों के लिए आरक्षित करता है उसे शेल्टर शुल्क, लेबर सेस, सब डिविजन चार्ज, सुपरवीजन चार्ज और लैंड यूज चेंज करने जैसे शुल्क में रियायत दी जाएगी। बता दें कि यह रियायत किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में करोड़ों में होती है।
बिल्डरों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे बिल्डर और गरीब दोनों का फायदा होगा। देहरादून में प्राइवेट बिल्डरों के प्रोजेक्ट में 35 फीसदी कोटा गरीबों के लिए आरक्षित होने से हर गरीब को छत मुहैया कराने का सपना और लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
- आशीष कुमार श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एमडीडीए
मात्र साढ़े तीन लाख में मिलेगा फ्लैट
ईडब्ल्यूएस में शहरी क्षेत्र के मलिन बस्तियों में रहने वालों, विस्थापितों और आवास विहीन गरीबों को छत मुहैया कराई जाएगी। ईडब्ल्यूएस फ्लैट की कीमत मात्र छह लाख रुपये है। इसमें डेढ़ लाख रुपये केंद्र और एक लाख रुपये प्रदेश सरकार अनुदान देगी। लाभार्थी को मात्र साढ़े तीन लाख रुपये देने होंगे। यह धनराशि भी आसान किस्तों पर देनी होगी।
शहरी विकास निदेशालय से लाभार्थी चयन
ईडब्ल्यूएस योजना में लाभार्थियों का चयन शहरी विकास निदेशालय की ओर से प्रदेश भर में किया जा रहा है। लाभार्थी नगर निगम में आवेदन करते हैं। नगर निगम की जांच के बाद ही उनका चयन होता है। देहरादून में विकास प्राधिकरण स्तर पर चयनित परिवारों के लिए फ्लैट मुहैया कराए जाने हैं।