इतिहासविद् और गढ़सेर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल दत्त पाठक कहते हैं कि कत्यूर घाटी में भवन और सार्वजनिक स्थलों के निर्माण के दौरान साठ के दशक में कई मूर्तियां मिलीं।
रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने से चक्रवृतेश्वर आदि मंदिरों में रखीं मूर्तियां आज भी बिखरीं पड़ी हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि न्यूयॉर्क की ओर से भारत को लौटाई गई मूर्ति चक्रवृतेश्वर या फिर कत्यूर घाटी के किसी और मंदिर की हो सकती है।
बैजनाथ निवासी बैजनाथ मंदिर समूह के मुख्य सचेतक भगवत गोस्वामी और मंदिर के महंत प्रकाश गिरि ने बताया कि बैजनाथ मंदिर के परिसर में संग्रहालय के अभाव में एक कमरे में 128 दुर्लभ मूर्तियां सालों से धूल फांक रहीं हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य मंदिर से 1975 में चोरों ने कुछ मूर्तियां चुरा लीं थीं जिन्हें राजस्व पुलिस ने बाद में बरामद कर लिया था।