तेरे नूर-नजर से नजर नहीं हटती, तेरे श्री चरणों में मेरी हस्ती है बसती, एक तेरा हाथ जो पकड़ा है बाबा, किसी और हाथ की जरूरत ही नहीं पड़ती। एक भजन की ये चंद लाइनें हरियाणा के पैंतीस वर्षीय महेश यादव पर सटीक बैठती है।
जिन्होंने शिव की भक्ति में दुनिया को भुला दिया है। उन्होंने आजीवन विवाह न करने का फैसला किया है। यह फैसला उन्होंने इसलिए किया ताकि कोई शिव की भक्ति में बाधा न बने। वे चार बार गंगोत्री, गोमुख से चार बार जल लेकर पैदल हरियाणा की यात्रा कर चुके हैं।
हरियाणा के जिला रेवाड़ी गांव रामपुरा के रहने वाले महेश यादव इस बार भी चारधाम यात्रा में जाने के लिए पहले की तरह बेहद उत्सुक हैं। कहते हैं कि बाबा के दर पर जाना हर इंसान के लिए एक नया जीवन पाने के समान है। महेश बाबा भोले भंडारी की भक्ति को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य मानते हैं।