उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने 1929 में देहरादून प्रवास के दौरान पीपल का पौधा लगाया था। जो 89 साल बाद भारी भरकम वृक्ष में तब्दील हो चुका है। लेकिन, इस पेड़ पर बीमारी ने हमला बोल दिया है। पेड़ पर जाले लग गए हैं, जो पेड़ को खराब कर रहे हैं।
दूसरी ओर पीपल के पेड़ की पिछले 30 साल से देखभाल कर रहे माली रामयश का कहना है कि पहले वह पेड़ की छंटाई कर दिया करता था। लेकिन अब उम्रदराज होने की वजह से पेड़ पर नहीं चढ़ पाता।
ऐसे में वह देखभाल नहीं कर पा रहा है। माली रामयश का कहना है कि ट्रीटमेंट करके पेड़ को बीमारी से बचाया जा सकता है।