आजादी की जंग का नेतृत्व करते हुए वह दो बार मसूरी आए बापू
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मसूरी से गहरा नाता रहा है। देश की आजादी की जंग का नेतृत्व करते हुए वह दो बार मसूरी आए।
यहां की शांत वादियों में कुछ दिन गुजारने के बाद वह नई ऊर्जा के साथ दोबारा आंदोलन में कूद पड़ते थे। मसूरी की शांत वादियों में वर्ष 1946 में महात्मा गांधी ने हैप्पी वैली स्थित उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला के आवास में करीब 10 दिन व्यतीत किया था।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि गांधी जी रोजाना सिल्वर्टन मैदान में प्रार्थना सभा करते थे। माल रोड पर वह पैदल घूमते और लोगों से मिलते थे। उनके पिता ऋषि भारद्वाज से गांधी जी के अच्छे संबंध थे। कभी-कभी वह उन्हें बुलाने के लिए रिक्शा भी भेजते थे। मसूरी से उनके प्रेम का जिक्र 1961 में प्रकाशित जस्टिस जीडी खोसला की पुस्तक ‘मसूरी एंड द दून वैली’ में किया गया है।