जिस हरिद्वार में मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा की उपाधि प्रदान की गयी, उस हरिद्वार ही नहीं अपितु पंचपुरी में बापू की एक भी प्रतिमा नहीं।
बापू के नाम पर बनी गांधी वाटिका कब की उजड़ चुकी है और गांधी मार्ग के शिलापट कब के उखाड़े जा चुके हैं। अपने जीवनकाल में तीन बार हरिद्वार आने वाले बापू की प्रतिमा लगाने की याद आज तक किसी को नहीं आयी।
बापू को सदैव आकर्षित करती रही गंगा
महात्मा गांधी की हरिद्वार यात्राएं खासी चर्चा का विषय रही हैं। गंगा तट पर विद्या की ज्योत जगा रहे वीतराग स्वामी श्रद्धानंद का आकर्षण उन्हें यहां खींच लाया था। गंगा तो बापू को सदैव आकर्षित करती रही है। यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि पंचपुरी में बापू की एक भी प्रतिमा नहीं है।
किसी चौराहे पर उनकी प्रतिमा नहीं
इस नगरी में शहीद उधमसिंह, क्रांतिकारी भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महामना मालवीय, लाल बहादुर शास्त्री आदि की प्रतिमाएं विद्यमान हैं। बापू की विरासत का दम भरने वालों को किसी चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगाने की याद नहीं आयी।
हरिद्वार नगरपालिका ने दशकों पूर्व डामकोठी से कनखल तक के मार्ग को महात्मा गांधी मार्ग दिया था। इस आशय के शिलापट सड़क के दोनों ओर से उखाड़े जा चुके हैं। माया देवी मैदान के समीप बापू के नाम से गांधी वाटिका विद्यमान थी। वह वाटिका अब अखाड़े और नगरपालिका के बीच मुकदमे का विषय बनकर कब की उजड़ गयी है। पंचपुरी में बापू की कोई निशानी नहीं।
कोई तो लगाए बापू की प्रतिमा
-बापू की उपेक्षा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस नगरी में बापू बार-बार आए, वहां उनकी प्रतिमा का न होना कृतघ्नता ही माना जाएगा। गुरुकुल में भी पुस्तकालय के बाहर गांधी प्रतिष्ठान में उनके आगमन का केवल शिलापट लगाया है। वास्तव में हरिद्वार में बापू की अनेक प्रतिमाएं लगनी चाहिए।
-डॉ विष्णुदत्त राकेश, प्रसिद्ध साहित्यकार
सफल नहीं हुए किए गए प्रयास
बापू की प्रतिमा लगाने के लिए कईं प्रयास किए। हरिद्वार विकास प्राधिकरण से चौराहे भी मांगे गए। इस बारे में लिखा-पढ़ी चलती रही पर प्रतिमा लगाने के लिए किसी ने जमीन नहीं दी। अब प्रयास होगा कि किसी निजी जमीन पर ही सही, बापू की प्रतिमा अवश्य लगायी जाए। आज तक प्रतिमा न लगने के लिए हम सभी क्षमाप्रार्थी हैं।
-गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा, कनखल