भगवान शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर्व पर करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने नीलकंठ धाम में दर्शन कर भगवान शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक किया। रात करीब साढे 12 बजे से नीलकंठ धाम हर, हर महादेव के उद्घोष से गूंजने लगा। नीलकंठ पैदल मार्ग और मोटर मार्ग पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। कोविड-19 संक्रमण भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं रोक पाई। शिवभक्तों की भीड़ ने कोविड-19 के निमयों को तारतार कर दिया।
लक्ष्मणझूला से करीब 25 किमी दूर नीलकंठ धाम प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। करोड़ों शिवभक्तों की श्रद्धा इस धाम से जुड़ी हैं। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर विभिन्न प्रांतों से शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। कोविड-19 के कारण देश, प्रदेश में अनेक बंदिशें हो गई थी। इस महाशिवरात्रि पर उम्मीद नहीं थी कि यहां शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ेगा। लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग पर वाहनों को दबाव बढ़ा।
गरुड़चट्टी से नीलकंठ पार्किंग तक वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। भीड़ के कारण दिनभर वाहन रेंगरेंग कर चलते रहे। बृहस्पतिवार प्रात:काल से ही शिवभक्तों ने गंगा में डुबकी लगाकर गंगाजल भरकर नीलकंठ धाम की ओर रवाना हुए।
नीलकंठ मंदिर धाम समिति के सदस्य धन सिंह राणा ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक करीब 83 हजार, 2 बजे तक एक लाख पांच हजार, चार बजे तक एक लाख 16 हजार, छह बजे तक एक लाख 40 हजार शिवभक्तों ने नीलकंठ धाम में दर्शन किए। कहा देररात तक धाम में जलाभिषेक चलता रहेगा। जिसका आंकड़ा दो लाख के पार कर जाएगा।
नीलकंठ धाम में पेयजल से मचा हलकान
महाशिवरात्रि पर्व पर नीलकंठ धाम में दर्शनार्थ के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे। धाम में इनके लिए शासन-प्रशासन की ओर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं थी। शिवभक्तों को होटल, ढाबा और दुकानों से पानी की बोतलें खरीदकर प्यास बुझानी पड़ी।
चप्पे, चप्पे पर रही सुरक्षा व्यवस्था
नीलकंठ धाम में चप्पे-चप्पे पर पुलिस प्रशासन और कुंभ प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। त्रिवेणीघाट में आईटीबीपी, लक्ष्मणझूला क्षेत्र में सीमा सशस्त्र बल और पुलिस बल के जवान तैनात रहे। सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी पुलिस कंट्रोलरुम में शिवभक्तों की सुरक्षा पर निगरानी बनाए हुए थी।