याचिका में कहा गया कि पूर्व में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने व सुविधाओं का बकाया ब्याज सहित बाजार मूल्य की दर पर किराया भरने के आदेश दिया था। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सीएम व दिवंगत एनडी तिवारी, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा व भुवन चंद्र खंडूड़ी को आवास खाली करने का आदेश भी दिया था।
बाद में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को नोटिस की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद-14 के समानता का अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का काम जनकल्याण होता है मगर सरकार सिर्फ पांच लोगों को ही फायदा पहुंचाने के मकसद से कानून क्यों बनाना चाहती है।