महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं शिवभक्त
दूसरे दिन अकेले सुनसान जंगल में बेलगाड़ी लेकर शिवलिंग के पास पहुंचे। शिवलिंग पर हाथ लगाते ही शिवलिंग हिलने लगा और वह शिवलिंग को अकेले ही बेलगाड़ी में रखकर लालढांग लाए और स्थापित कर दिया। तब से आज तक महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक करते आ रहे हैं।
प्राचीन शिव मंदिर के वर्तमान पुजारी काशीनाथ मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर जलाभिषेक के लिए साफ-सफाई और पेंट कर लिया गया है। सात मार्च को रात्रि से ही कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्त जलाभिषेक करेंगे। उन्हाेंने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर लालढांग में महाशिवरात्रि मेले का आयोजन भी होता है। विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
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पांडववाली स्रोत में बिताया था पांडवों ने अज्ञातवास
बताते हैं कि जिस स्थान से शिवलिंग लाया गया। वहां पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था। इसके चलते इसका नाम पांडववाली स्रोत पड़ा, जो वर्तमान में राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल में आता है, जो रिजर्व फॉरेस्ट का क्षेेत्र है। इसके कारण अब उस स्थान पर सामान्य रूप से आने-जाने में पूर्ण रूप से प्रतिबंध है।