डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि सूर्य का मेष राशि में प्रवेश एक महीने चलेगा। भगवान सूर्य पंद्रह मई को मेष राशि से निकल जाएंगे। उसी के साथ कुंभ का चालीस दिन का पर्वकाल भी समाप्त हो जाएगा। इन चालीस दिनों में जो भी स्नान पर्व पड़ेंगे, उन्हें कुंभ का स्नान कहा जा सकता है।
कोरोना को देखते हुए कुंभ का स्वरूप नए सिरे से निर्धारित किया जा रहा है। इस संबंध में अखाड़ा परिषद ने ज्योतिषशास्त्र के ज्ञाताओं से भी जानकारियां ली है। सभी ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक कुंभ राशि में बृहस्पति नहीं आएंगे, कुंभ का कोई स्नान मान्य नहीं होगा।
अलबत्ता संन्यासियों में भगवान शिव की महारात्रि के दिन स्नान करने की परंपरा है। परिणामस्वरुप 11 मार्च महाशिवरात्रि के दिन एक स्नान का आयोजन किया जाएगा। कुंभ मेला काल भले ही एक जनवरी से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन कुंभ का पर्वकाल पांच अप्रैल से पूर्व प्रारंभ नहीं होगा।