अबुल ने मायापुरी और हरिद्वार दोनों नामों का जिक्र किया। 1776 में मुगल सम्राट शाह आलम ने तो कुंभ लूटा, लेकिन इतिहासकार जमीयत खान ने कुंभ की धार्मिकता तथा साधुओं की संख्या का लंबा उल्लेख जमीयतनामा में किया।
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अकबर के इतिहासकार मिर्जा उमर भी जयपुर नरेश राजा मानसिंह के साथ कुंभ में आए। उसने मानसिंह के अखाड़ों में जाने का उल्लेख किया। मानसिंह ने माया देवी के दर्शन किए। यह सर्वविदित है कि अकबर अपने पीने और हिंदू महारानियों के लिए गंगाजल हरिद्वार से ही मंगाता था।
इसके लिए हाथी सवार दस्ता बनाया गया था। अकबर की राजपूत पत्नियां कुंभ स्नान करने हरिद्वार आती थीं, जिनके लिए श्यामपुर मार्ग पर महल बनवाया गया था। वह महल आल्हा-ऊदल के किलों के साथ ध्वस्त हो चुका है।