गुरूवार को पौष मास संपन्न हो गया। पूर्णिमा के दिन होने वाला स्नान बेहद फीका रहा।
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कुछ हजार श्रद्धालु ही गंगा नहाने पहुंचे। शुक्रवार से पवित्र माघ का स्नान प्रारंभ हो रहा है। पौष मास को खर मास भी कहा जाता है। इस महीने पितृ निमित्त कथाओं की खासी धूम रही।
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पूर्णिमा के दिन मास का समापन हो गया लेकिन स्नानार्थियों की संख्या कुछ हजार तक ही सीमित रह गयी। स्नानार्थियों में अधिकांश श्रद्धालु वे थे जो संक्रांति के दिन डुबकी लगाने आए थे। पूर्णिमा नहाकर वे सभी वापस लौट गए।
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कुशावर्त पर यज्ञोपवीत संस्कार गुरुवार को भी काफी हुए। माघ मास का स्नान मुख्य रूप से प्रयाग और गंगासागर में होता है। प्रयाग में तो श्रद्धालु एक मास का कल्पवास भी करते हैं।
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हरिद्वार में पूरे मास श्रद्धालु अपनी सुविधा के हिसाब से आते रहते हैं। 30 जनवरी मौनी अमावस्या के दिन लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाने आएंगे। माघ के आखिरी पांच दिनों में पंचस्नानि होगी जिसे करने के लिए खासी में श्रद्धालुओं का आगमन होगा।