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माघ महोत्सवः मीना और कुलदीप के गीतों पर झूमें युवा

Mon, 15 Feb 2016 02:09 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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माघ महोत्सव के समापन अवसर पर उत्तराखंड की सुर कोकिला मीना राणा और हिमाचली नाटी सम्राट कुलदीप शर्मा के गीतों पर युवक थिरकते रहे। प्रदीप असवाल, नरेश शाह, वीरेंद्र बिष्ट, वचन राणा, कुसुम नेगी, सीमा चौहान, प्रेम हिंदवाण ने भी अपनी ऐतिहासिक, पारंपरिक और मार्मिक प्रस्तुतियों से समां बांधा।
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दून विश्वविद्यालय मार्ग स्थित टिहरी नगर मैदान में रविवार को कार्यक्रमों की पहली प्रस्तुति नरेश शाह ने पारंपरिक जौनसारी गीत ‘पंद्रह गते फागुण ली, मैं तेर जजोड़ा सुणा ली, मैं तेरा पावणा, तैं बोलो ना ...’ और प्रदीप असवाल ने ‘किंगर क झाल घुघुती, घुर घुरांदी घुघुती ...’ ने दी। इसके बाद बिरसू और साक्षी कला मंच जौनसार के गायक वीरेंद्र बिष्ट और वचन राणा ने हारूल और तांदी नृत्य से समां बांधा। कुछ देर बार गायक कुसुम नेगी और सीमा चौहान ने मांगल गीत से रवांई और जौनपुर की लोक संस्कृति का अहसास करवाया।

जोशीमठ से आए भोटिया जनजाति के गायक प्रेम हिंदवाण और उनके दल ने भोटिया संस्कृति को मंच पर संजीदा किया। कुलदीप शर्मा ने सरस्वती मां की वंदना के बाद ‘हाय रे साड़िये तू ... नाचण दे मूं ...’, ‘कांडा लागा कुमरा रे’, ‘छुपकु यारा यो कड़िया जुग, छुपकु यार’ के स्लो और फारवर्ड मोशन की हिमाचली म्यूजिक नाटी से मौजूद लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। कुलदीप ने अपनी पिछले साल रिलीज हुई ‘घंटी बाजी फोन री तेरी बबलिये कैन सुणदी मुबाइल ...’ गाकर सभी को आनंदित कर दिया। मीना राणा ने ‘जमुना को पाणी, अगलाड़ की माछी...’, ‘फुलु कु हंसिया रे ...’ से लोगों को झुमाया। जब उन्होंने ‘अगली, बगली हे लौंडा चंदर ...’ गाया तो सभी लोग पंडाल में आकर झूमने लगे।
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कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह चौहान, पूर्व सीएम व वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश पोखरियाल और ग्राफिक एरा विवि के मालिक कमल घनसाला ने तीन बजे कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव व जनजाति आयोग के अध्यक्ष एनएस नपलच्याल, पूर्व गढ़वाल मंडल आयुक्त अजय नबियाल, पूर्व शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल, सुशील गौड़, डॉ. रोशन नौटियाल, विजय प्रकाश बंधानी, सच्चिदानंद नौटियाल, असिता डोभाल, सरोज थपलियाल आदि मौजूद रहे।


लाखामंडल संग्रहालय में रखें मूर्तियां
आयोजक गीताराम गौड़ ने पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के माध्यम से पुरातात्विक एवं पर्यटन स्थल लाखामंडल में केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ा संग्रहालय बनवाने की मांग रखी। उन्होंने कहा यहां छठी शताब्दी की दुर्लभ ऐतिहासिक मूर्तियां इस संग्रहालय में रखी जाए ताकि उस पर आने वाली पीढ़ी परिचित हो शोध कर सके। वर्ष 2003 में लाखामंडल से चोरी हुई बेशकीमती और दुर्लभ नौ मूर्तियां दिल्ली में पकड़े गए बाबरी गुट से बरामद हुई थी।

ये मूर्तियां अभी भी दिल्ली के एएसआई मालखाने में धूल फांक रही हैं। उन्हें लाखामंडल संग्रहालय में रखा जाए। उन्होंने बताया कि 200 मीटर के बाद जो अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जाते हैं उसे हटाया जाए ताकि हनोल और लाखामंडल के जनजाति क्षेत्र का विकास हो सके। जनजाति समुदाय के लोगों को भवन बनाने में एएसआई की ओर से प्रतिबंध न लगाया जाए।
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