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आम दर्शनों के खुले मद्महेश्वर व रुद्रनाथ के कपाट

Thu, 18 May 2017 07:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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रुद्रनाथ मंदिर - फोटो : amarujala
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द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर और चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। दोनों धामों में इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद शिव भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। अब छह माह तक भगवान धाम में ही भक्तों को दर्शन देंगे।
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रुद्रप्रयाग जिले में मद्महेश्वर मंदिर के कपाट पूर्वाह्न 11 बजे खोल दिए गए। इससे पहले भगवान की डोली प्रात: 10.50 बजे धाम पहुंची। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद आराध्य ने अपने पात्रों का निरीक्षण किया। पुजारी राजशेखर लिंग ने चल विग्रह डोली में विराजमान भगवान की भोग मूर्ति की पूजा-अर्चना की और अभिषेक किया।

इसके बाद मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। यहां भगवान को समाधि देते समय स्वयं भू लिंग पर चढ़ाए गए भृंगराज, कुषण, भष्म, अक्षत, चंदन के पुष्प भक्तों में प्रसाद के रुप में वितरित किए गए। इस दौरान मंदिर में बाबा के दर्शनों के लिए करीब तीन सौ से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे। उन्होंने प्राकृतिक स्रोत के शुद्ध जल से भगवान मद्महेश्वर का जलाभिषेक कर मनौती मांगी।
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चमोली जिले में रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सुबह सात बजे खोल दिए गए। इस दौरान करीब 500 शिव भक्तों ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए। मंदिर के पुजारी आचार्य जनार्दन तिवारी ने मंदिर के कपाट खुलने के बाद रुद्रनाथ की अभिषेक पूजा की।

उन्होंने बताया कि हिमालय क्षेत्र में स्थित पंच केदारों में प्रथम केदार केदारनाथ में भोलेनाथ के पश्च भाग, द्वितीय केदार मद्महेश्वर में मध्य भाग, तृतीय केदार तुंगनाथ में भुजा, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में मुख और पंचम केदार कल्पनाथ में जटाओं की पूजा होती है। कल्पनाथ में भोलेनाथ की सालभर पूजा होती है, जबकि अन्य चार केदारों में शीतकाल में कपाट बंद हो जाते हैं। रुद्रनाथ में स्थानीय लोगों की ओर से दो स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। 
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ऐसे पहुंचें रुद्रनाथ मंदिर

rudrnath temple
ऋषिकेश से गोपेश्वर-ऊखीमठ मोटर मार्ग पर सगर गांव तक 205 किलोमीटर दूरी वाहन से तय करने के बाद सगर गांव से 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रुद्रनाथ मंदिर तक पहुंचा जाता है। रुद्रनाथ मंदिर तक जाने के पैदल रास्ते में पुंग, पनार और पित्रधार जैसे सुरम्य बुग्याल क्षेत्र हैं, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। रुद्रनाथ क्षेत्र में बेशकीमती जड़ी-बूटियां भी पाई जाती हैं।  

ऐसे पहुंचे मद्महेश्वर मंदिर
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे से रुद्रप्रयाग और रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ होते हुए 200 किमी का रास्ता वाहन से तय कर रांसी गांव पहुंचा जाता है। रांसी से 18 किमी पैदल गौंडार गांव होते हुए द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर तर पहुंच सकते हैं।

गौंडार गांव में भगवान की डोली की हुई विशेष पूजा
मद्महेश्वर धाम के अंतिम पड़ाव गौंडार में पुजारी राजशेखर लिंग ने भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली की विशेष पूजा की। इस मौके पर ग्रामीणों ने मौसमी फल, सब्जी भेंट कर भगवान को धाम के लिए विदा किया। डोली बणतोली, खटारा, नानू, मैखुमा, कुनचट्टी होते हुए 12 किमी का पैदल रास्ता तय कर 10.50 मिनट पर देवदर्शनी नामक स्थान पर पहुंची।

यहां पर अल्प विश्राम किया। इसके बाद मद़्महेश्वर मंदिर में मौजूद थौर भंडारी मदन सिंह रावत द्वारा शंख ध्वनि से भगवान को धाम आने का न्योता दिया गया। न्योता स्वीकार करने के बाद भगवान अपने धाम पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।
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