द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट शीतकाल के लिए आज प्रात: 8:30 बजे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। कपाट बन्द होने के अवसर पर 155 श्रृदालु मौजूद रहे।
इसके बाद अब बाबा की डोली रात्रि प्रवास के लिए प्रथम पड़ाव गौंडार गांव पहुंचेगी। जबकि 25 नवंबर को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में छह माह के लिए विराजमान होगी।
गुरुवार को सुबह 6 बजे से ही मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने आराध्य का श्रृंगार कर आरती कर उन्हें भोग लगाया। इसके बाद बाबा की भोगमूर्ति को डोली में विराजमान किया। साथ ही स्वयंभू शिवलिंग को फूल और पूजन सामग्री से ढककर समाधि रूप दिया।
बह 8:30 बजे शुभ लग्न पर मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। भगवान मद्महेश्वर की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा करते हुए शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी। डोली प्रभारी आशीष पुष्पवाण ने बताया कि कुन्नू, खटरा, बणतोली होते हुए 12 किमी का सफर तय कर डोली पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंचेगी।
यहां पर ग्रामीणों द्वारा भगवान को सामूहिक अर्घ्य लगेगा। इसके बाद 23 को गौंडार से 6 किमी पैदल दूरी तय करते हुए डोली रांसी गांव पहुंचेगी। जबकि 24 को गिरिया और 25 को ऊखीमठ पहुंचेगी। इस दिन यहां भगवान के डोली आगमन पर भव्य मेला का आयोजन भी होगा, जिसकी तैयारी मंदिर समिति, प्रशासन और नगर पंचायत द्वारा जोरों पर की जा रही है।