द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट शीतकाल के लिए 21 नवंबर को सुबह 8.30 बजे बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंचेगी।
यहां से 22 को रांसी व 23 को गिरिया गांव में रात्रि प्रवास होगा। 24 नवंबर को बाबा मद्महेख्वर शीतकाल की छह माह की पूजा-अर्चना के लिए ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हो जाएंगे।
आराध्य के शीतकालीन गद्दी स्थल आगमन पर ऊखीमठ में 22 नवंबर से तीन दिवसीय मेला मद्महेश्वर मेला भी शुरू होगा। यह मेला, केदारघाटी की लोक संस्कृति, सभ्यता और रीति-रीवाजों का प्रतीक भी है।
साथ ही स्थानीय उत्पादों को बाजार भी मुहैया कराता है। मद्महेश्वर मेला जनपदस्तीय मेला है, जिसमें प्रशासन, पुलिस और सभी विभागों की भागीदारी होती है। मेला आयोजन को लेकर समिति द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
साथ ही तीन दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मेला में स्कूली बच्चों समेत महिला व युवक मंगल दलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है।