यूं तो राजधानी में हर दिन गोरखधंधे की एक नई कहानी सामने आती रहती है लेकिन इस दफा मामला थोड़ा बड़ा है। एमडीडीए के अधिकारियों ने मिलीभगत से एक व्यक्ति आवासीय भवन के नक्शे पर धडल्ले से होटल संचालित कर रहा है।
एमडीडीए में कंपाउंडिंग (शमन) के नाम पर जबर्दस्त खेल चल रहा है। माजरा में आवासीय मानचित्र पर पूरा एक होटल खड़ा कर दिया गया।
गेस्ट हाउस के नक्शे पर होटल
सराय एक्ट में होटल के नाम पर पंजीकरण भी कराया गया, लेकिन एमडीडीए में उस होटल का मानचित्र सितंबर 2011 में गेस्ट हाउस के तौर पर पास कर दिया गया। जबकि, मौके पर आज भी होटल चल रहा है।
सहारनपुर रोड पर माजरा में लक्ष्मी पैलेस नाम से होटल चल रहा है। आवासीय मानचित्र के नाम पर 2007-08 में होटल खड़ा कर दिया गया। इसको लेकर एमडीडीए की ओर से नोटिस जारी किया गया था।
होटल को कंपाउंड करने की भी हुई कोशिश
इसके बाद कई बार होटल को कंपाउंड करने के लिए कोशिश की गई, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने इसे शमन करने से साफ तौर पर मना कर दिया। क्योंकि, यह होटल के तौर पर शमन ही नहीं किया जा सकता था।
इसी बीच 2010 में सराय एक्ट के तहत होटल के तौर पर जिलाधिकारी कार्यालय से पंजीकरण करा लिया गया, लेकिन 2011 में इस होटल का मानचित्र गेस्ट हाउस के तौर पर पास कर दिया गया। इस पूरे खेल में एमडीडीए के तत्कालीन अभियंता शामिल रहे।
RTI में हुआ खुलासा
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में पूरे खेल का खुलासा हुआ है। अभी तक इस पर एमडीडीए के अधिकारियों ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है।
ऐसे में कोई संदेह नहीं कि देहरादून में ऐसे ही कई मामले और भी प्रकाश में आ सकते हैं। एमडीडीए के अधिकारियों की भूमिका भी ऐसे मामलों में अक्सर संिअग्ध ही ज्यादा नजर आती है।
इनकी भी सुनिएः
यह प्रकरण संज्ञान में आया है। जल्द ही इसको लेकर एमडीडीए की ओर से होटल मालिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही अभियंताओं से भी पूछताछ की जाएगी।
- बंशीधर तिवारी, सचिव एमडीडीए