223 साल से उत्तराखंड के बॉर्डर पर स्थापित प्रसिद्ध मां डाट काली मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। जैसे-जैसे मंदिर के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है, वैसे ही मंदिर और आस्था का मार्ग भी विस्तार लेता जा रहा है। मंदिर के प्रति ऐसी आस्था है कि कोई भी नया वाहन लिया जाता है तो अपने घर से पहले लोग मां डाट काली के दरबार में लेकर पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा कराकर चुनरी बंधवाई जाती है, इसके बाद ही वाहन का प्रयोग किया जाता है।
दून-सहारनपुर बॉर्डर पर स्थित मां डाट काली मंदिर मंगलवार को अपने 223 साल पूरे करने जा रहा है। मंदिर का इतिहास जितना रोचक है उनकी ही बड़ी मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था है। मान्यता है कि जब मंदिर के पास सुरंग निर्माण चल रहा था तो लगातार बाधा आई। उस समय अंग्रेज इंजीनियर के सपने में मां काली आईं और दबी प्रतिमा होने का पता चला। इसके बाद मां डाट काली की प्रतिमा निकालकर स्थापित की गई। इसके बाद सुरंग का निर्माण निर्विध्न संपन्न हुआ। तब से ही मंदिर के प्रति लोगों की आस्था है। मंदिर के महंत शुभम गोस्वामी बताते हैं कि नया वाहन लेने पर भक्त मां डाट काली मंदिर में पहुंचकर पूजन और माता की चुनरी अवश्य बंधवाते हैं।
मान्यता है कि नए वाहन पर माता की चुनरी बंधवाने से मां खुद वाहन और भक्तों की रक्षा करती है। दून के साथ ही यूपी समेत अन्य राज्यों के भक्त मंदिर में पहुंचकर दर्शन करते हैं। वहीं, 101 साल से मंदिर में अखंड जोत भी जल रही है। अप्रैल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंदिर पहुंचकर मां डाट काली के दर्शन कर चुके हैं।