उधर, नैनीताल जिले में रोजाना औसतन 90 हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है। लंपी वायरस के मामले आने के बाद रोजाना करीब 1000 लीटर दूध के उत्पादन में गिरावट आई है। ओखलकांडा क्षेत्र में लंपी वायरस की वजह से 27 गौवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। यहां और भी कई गौवंशीय पशु इस बीमारी की चपेट में है। नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने बताया कि लंपी वायरस की रोकथाम के लिए टीम को सक्रिय किया गया है।
उधर, पशुपालन विभाग ने ऊधमसिंह नगर और नैनीताल से 30 पशुधन प्रसार अधिकारियों को पिथौरागढ़ पहुंचने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को इन्हें प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के टीकाकरण के लिए भेजा जाएगा। अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पंकज जोशी ने बताया कि पशु अब बीमारी से उबरने लगे हैं। अभी 586 पशु बीमारी से प्रभावित हैं।