प्रदेश सरकार का फोकस 40 से 45 वर्ष के ऐसे शिक्षकों पर है जिनके अंदर नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता है। उनकी प्रबंधन, नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए आईआईएम काशीपुर समेत अन्य संस्थानों से प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। ऐसे शिक्षकों के पास इस पद पर काम करने के लिए 15 से 20 साल का समय होगा।
सीधी भर्ती की व्यवस्था नहीं
55 प्रतिशत एलटी शिक्षक और 45 प्रतिशत प्रवक्ता पदोन्नति के बाद प्रधानाध्यापक बनते हैं। प्रधानाध्यापक पद पर पांच वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वह प्रधानाचार्य पद की डीपीसी में शामिल होने के अर्ह हो जाते हैं। प्रधानाचार्य पद पर अभी सीधी भर्ती की कोई व्यवस्था नहीं है। 7600 ग्रेड पे का पद होने के कारण लोक सेवा आयोग भी इस पर भर्ती नहीं कर सकता है।
प्रधानाचार्य की कमी दूर करने के सरकार ने पहले भी कई प्रयोग किए हैं। इनकी पांच साल की सेवा में शिथिलीकरण देते हुए सरकार ने ढाई साल की सेवा के बाद ही प्रधानाचार्य बना दिए। वहीं, पिछली सरकार ने तदर्थ प्रधानाचार्य भी बनाए। सरकार ने पांच साल से पहले ही सभी प्रधानाध्यापकों को प्रधानाचार्य बना दिया। अब वह 7600 ग्रेड पे तो ले रहे हैं, लेकिन नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।
प्रधानाचार्य का पद किसी भी विद्यालय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर स्थायी प्रधानाचार्य नहीं होगा तो बहुत से काम प्रभावित होते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता समेत अन्य बिंदुओं पर बेहतर काम करने के लिए प्रधानाचार्यों के पद भरने पर इस समय फोकस है। उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देकर 15 से 20 साल तक काम करने का अवसर दिया जाएगा। तभी वह अच्छे परिणाम दे सकेंगे।
- डा. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, शिक्षा