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कनेक्शन आपका और चूल्हा एजेंसी की पसंद का

Fri, 22 Nov 2013 10:21 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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अगर आप नए गैस कनेक्शन के बाद चाहते हैं कि अपनी पसंद का चूल्हा घर ले जाएं तो आपकी यह हसरत पूरी नहीं हो सकती, क्योंकि एजेंसी आपको कनेक्शन के साथ चूल्हा भी थमा देगी। कनेक्शन के साथ चूल्हा एजेंसी की पहली शर्त है, जबकि ऐसा नियमों के विरुद्ध है।
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राजधानी दून में अब क्लेमनटाउन पीपल्स वेलफेयर सोसायटी ने गांधीवादी तरीके से एजेंसियों की इस मनमानी के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है।

सोसायटी की ओर से लगाई गई आरटीआई में भले ही जवाब दिया गया हो कि नए कनेक्शन के साथ सिर्फ सिलेंडर और रेगुलेटर ही दिया जाता है लेकिन हकीकत इससे परे है। असल में लोगों को जबरन पतले स्टील वाली गैस, लाइटर, पाइप सहित पूरी किट थमा दी जाती है।

ढाई से तीन हजार तक का खर्च
यानी कि जिस काम में हजार से बारह सौ रुपये लगने थे, उस पर ढाई से तीन हजार तक का खर्च आ जाता है। ऐसे में लोग एजेंसी की ओर से दिया जाने वाला जैसा-तैसा चूल्हा ही लेकर चलते बनते हैं।
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इतना ही नहीं नई कूपन बुक लेते समय सिर्फ शुल्क जमा करने की बात आरटीआई के जवाब में कही गई है, जबकि लोगों से आईडी, राशन कार्ड आदि मांगे जाते हैं।

एजेंसियों ने खुद नियम बनाए
सूचना में यह भी सामने आया कि गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय-सीमा नहीं है। एक सिलेंडर लेने के बाद तुरंत भी दूसरा सिलेंडर बुक करा सकते हैं जबकि एजेंसियों ने खुद नियम बनाया है कि 21 दिनों के बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कराया जा सकता है।

सिलेंडर बुक कराने के बाद 48 घंटे में आपूर्ति की बात कही गई है। लेकिन इसमें सप्ताह भर, पंद्रह दिन या एक महीने का समय लग जाता है।

ये चला रहे गांधीवादी मुहिम
क्लेमनटाउन पीपल्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष राकेश जुयाल ने कहा कि हर उपभोक्ता को अपनी लड़ाई अलग-अलग लड़नी पड़ती है।

हम चाहते हैं कि उपभोक्ता भी मिलकर एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाएं। नियमों की कॉपी स्वयंसेवक हर गैस एजेंसी पर चिपकाएंगे और वहां आने वाले उपभोक्ताओं से अनुरोध करेंगे कि यदि आप कुछ भी इन नियमों के विरुद्ध पाते हैं तो कृपया चुप न बैठें, सब साथ मिलकर आवाज उठाएं।

शिकायत पर तलब कर चुके एजेंसियों को
दो बार ऐसी शिकायत मिली है कि लोगों को गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा दिया जा रहा है। इस पर संबंधित गैस एजेंसियों से बात की गई लेकिन उन्होंने इससे साफ मना कर दिया। एजेंसी प्रबंधकों का कहना है कि किसी को चूल्हा या किट लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। प्रयास किया जाता है कि नियमों के अनुसार ही एजेंसियां काम करें, खुद कोई नया नियम ना बनाएं।---श्याम आर्य, डीएसओ
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