उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य होगा जहां पर निचली अदालतें भी लोकायुक्त के दायरे में आएंगी। हालांकि इसमें कुछ जटिलताएं भी हैं।
विधेयक में कोई संशोधन नहीं
राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की खंडूड़ी सरकार की ओर से भेजे गए लोकायुक्त विधेयक में कोई संशोधन नहीं किया। जस का तस मंजूरी दिए जाने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय तक के सभी जजों का कामकाज भी नए लोकायुक्त के दायरे में होगा।
दूसरी ओर संविधान के अनुच्छेद 227 में उच्च न्यायालय को जजों की नियुक्ति से लेकर उनके खिलाफ जांच कराने या अभियोजन की कार्यवाही करने का अधिकार है। इस तरह से समस्त न्यायिक अफसरों की कंट्रोलिंग अथॉरिटी उच्च न्यायालय को बनाया गया है।
यदि किसी जज के खिलाफ आरोप साबित भी होता है, तो अभियोजन की मंजूरी देने का अधिकार उच्च न्यायालय के पास ही है। इस संवैधानिक व्यवस्था को किसी एक्ट से ओवररूल नहीं किया जा सकता। ऐसे में लोकायुक्त को फिर भी उच्च न्यायालय की मर्जी पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
लंबी संशोधन प्रक्रिया
यदि सरकार नए लोकायुक्त एक्ट में संशोधन करना चाहेगी तो उसके लिए फिर उसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहले विधायी विभाग ड्राफ्ट तैयार करेगा, फिर कैबिनेट की मंजूरी के बाद सदन में पटल पर रखा जाएगा।
सदन की मंजूरी के बाद राज्यपाल से अनुमोदन लेकर राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।
एक हफ्ते में जारी होगी अधिसूचना
राज्य में नए लोकायुक्त एक्ट की अधिसूचना एक सप्ताह में जारी कर दी जाएगी। इसके बाद 180 दिन में इसे लागू करना होगा। इस दौरान लोकायुक्त की सेवा नियमावली तैयार होगी और कमेटी गठन होने से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
सरकार यदि मार्च 2014 तक भी नए लोकायुक्त की नियुक्त कर देती है तो मौजूदा लोकायुक्त को अपने कार्यकाल से नौ महीने पहले ही रिटायर होना होगा। फिलहाल लोकायुक्त एक्ट के प्रकाशन का काम शुरू हो गया है।
कैबिनेट से मंजूर कराना होंगे रूल रेगुलेशन
अधिसूचना जारी होने के तत्काल बाद लोकायुक्त की सेवा नियमावली, रूल रेगुलेशन तैयार होंगे और उन्हें कैबिनेट से मंजूर कराना होगा।
इसके बाद ही लोकायुक्त में अध्यक्ष और सदस्यों का चयन हो सकेगा, लेकिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी तब तक मौजूदा लोकायुक्त पुराने पैटर्न पर ही काम करते रहेंगे।
प्रमुख सचिव विधायी केडी भट्ट ने कहा कि एक्ट प्रकाशित करने के लिए भेजा गया है। अगले सप्ताह तक इसके लागू करने की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। इसके बाद आगे की कार्यवाही शुरू होगी।
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