पछवादून क्षेत्र में हिंदी दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सामाजिक और साहित्यिक संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित कर मातृभाषा के उत्थान का संकल्प लिया। हरबर्टपुर में पछवादून विकास मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संयोजक अतुल शर्मा ने कहा कि हिंदी अब केवल उत्तर भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि वैश्विक स्तर पर संवाद, शिक्षा और डिजिटल माध्यमों की प्रमुख भाषा बन गई है। संयुक्त राष्ट्र और विदेशी विश्वविद्यालयों में इसका बढ़ता प्रयोग इसके महत्व को दर्शाता है। इस दौरान मुकेश राज शर्मा, सुनील नौटियाल, मनोज राठौर, आनंद सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
क्षेत्र की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य संगम पछवादून की ओर से एक निजी आवास पर काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी के दीप प्रज्ज्वलन व संतोष गोयल की सरस्वती वंदना से शुरू हुई गोष्ठी में कवियों ने खूब तालियां बटोरीं।
युवा कवि कुणाल ने मर्यादा की सत्यमूर्ति जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं और कवयित्री अंजू राजपुतानी ने ओज गीत ये हिंदी भूल जाओगे तो फिर से दास्तां होगी सुनाकर जोश भरा। मोनिका धीमान ने उसे जीने का अधिकार नहीं, वह गरीब घर की बेटी है और बाल कवयित्री एंजल ने आओ विकास के रस्ते खोलें, मिलकर अपनी हिंदी बोलें से मंत्रमुग्ध किया। वहीं, शायर मजाहिर खान ने जब से गए हैं पिया गांव से गजल पेश कर खूब वाहवाही लूटी। वरिष्ठ कवि पवन शर्मा, इंदु डिमरी और वरिष्ठ साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी ने भी अपनी शानदार रचनाएं पेश कीं। गोष्ठी का संचालन डॉ. मदनपाल बिरला गजब ने किया।
संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है हिंदी
विकासनगर स्थित एसबी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सुधा वर्मा ने कहा कि हिंदी केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह हम देशवासियों की संस्कृति, परंपरा और भावनाओं से जुड़ी भाषा है। उन्होंने सभी से हिंदी को दैनिक जीवन में पूरे गर्व के साथ आत्मसात करने का आह्वान किया। इस मौके पर सुमित, शिवांगी, आशीष, प्रियांशु, संध्या, वर्षा, नदीम, प्रतिभा सहित कई छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।