प्रदेश में आई आपदा के बाद से चार धाम यात्रा बंद होने से माणा गांव के ग्रामीणों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। यात्रा बंद होने के कारण यहां निवास करने वाले जनजाति के लोग अपने उत्पादों को नहीं बेच पा रहे हैं।
जबकि प्रत्येक वर्ष यात्रा काल में ग्रामीण ऊन से बने टोपी, स्वेटर, पंखी, गुदमा (चुटका) और सब्जियां आदि यात्रियों को बेचकर अच्छी खासी कमाई कर लेते थे।
उत्तराखंड आपदा की हर अपडेट के लिए क्लिक करें
भारत-चीन सीमा के पर बसे माणा गांव में जनजाति के करीब 150 परिवार निवास करते हैं। भोटिया जनजाति के इन परिवारों की आर्थिकी सीधे तौर पर बदरीनाथ यात्रा से जुड़ी है। यहां के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय ऊनी कपड़ों का व्यापार, पशुपालन और खेती पर निर्भर है।
इस वर्ष यात्रा बंद होने से ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार आपदा के बाद से प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण अपने भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।
स्थानीय निवासी गंगा सिंह रावत का कहना है कि ग्रामीणों के तैयार ऊनी कपड़ों पर अब फफूंदी लगने लगी है। माणा निवासी लक्ष्मण सिंह, मोहन सिंह और माहेश्वरी देवी का कहना है कि खेतों में सब्जियां उग रही हैं। लेकिन बदरीनाथ में सन्नाटा पसरा है।
सामान को निचले बाजारों तक पहुंचा सकेंगे
खेतों से सब्जियां बदरीनाथ ले तो जा रहे हैं, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पैदल मार्ग दुरुस्त हो जाए तो सब्जियों और तैयार ऊनी कपड़ों को निचले बाजारों में बेचा जा सकता है। इधर, एसडीएम एपी बाजपेयी ने बताया कि सोमवार को बदरीनाथ-जोशीमठ मार्ग को पैदल आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। जिसके बाद ग्रामीण तैयार सामान को निचले बाजारों तक पहुंचा सकेंगे।
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें