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ग्लेशियर झीलों की होगी मैपिंग

Mon, 29 Jul 2013 08:57 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति अब राज्य में मौजूद ग्लेशियर की झीलों की मैपिंग करेगी। कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली समिति ने ग्लेशियरों पर शोध करने वाले संस्थानों से मिलकर 127 ऐसी झीलों को चिह्नित किया है। समिति झीलों की स्थिति और उनसे संभावित खतरे का अनुमान लगाकर एक रिपोर्ट तैयार करेगी।
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केदारनाथ में हुई तबाही को ग्लेशियर की झील के टूटने से जोड़े जाने के बाद अब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति सभी ऐसी झीलों की मैपिंग करवा रही है, जिससे वहां जलभराव की स्थिति का आकलन हो सके। ग्लेशियरों पर बर्फ पिघलने से अस्तित्व में आने वाली इन झीलों से मानसून सीजन में खतरा बढ़ जाता है। कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली समिति ने इसके लिए सेटेलाइट मैपिंग के साथ एरियल सर्वेक्षण का भी फैसला लिया है।

मैपिंग से भविष्य में अस्तित्व में आने वाली नई झीलों का पता भी लग सकेगा।

खतरे का समय रहते लगेगा पता
मैपिंग से समय रहते खतरे का पता चल सकेगा। इतना ही नहीं ऐसे क्षेत्र भी चिह्नित हो सकते हैं, जिन्हें झील के टूटने से खतरा हो सकता है। ऐसे में उन्हें संवेदनशील घोषित कर वहां सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त किया जा सकता है।
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कैसे होगी मैपिंग
ग्लेशियर झीलों को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति जो मैपिंग करवा रही है, उसके लिए ग्लेशियर पर शोध करने वाले सभी संस्थानों से मदद ली जाएगी। इन्हीं संस्थानों से डाटा एकत्रित कर झीलों की स्थिति को लेकर समग्र तस्वीर बनेगी।

क्या होती है मैपिंग
मैपिंग में झीलों की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल, जल रिसाव या फिर किसी भी तरह का खतरा, पानी के जलस्तर पर निगरानी रखी जाती है।

अत्याधुनिक उपकरण स्थापित होंगे
समिति मौसम पूर्वानुमान के लिए अत्याधुनिक उपकरणों को हिमालयी क्षेत्र में स्थापित करने का खाका तैयार कर रही है। पूर्वानुमान सही मिलने के साथ आपदा के समय पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर संचार प्रणाली विकसित करने को लेकर भी कई शोध संस्थानों से मदद ली जा रही है।
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