नाग पंचमी पर देहरादून के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर सर्पों का भय दूर करने के लिए लोगों ने विशेष अभिषेक किया। मंदिरों में नाग-नागिनी के जोड़े चढ़ाकर पानी में प्रवाहित किए गए।
टपकेश्वर मंदिर में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। मंदिर प्रबंधन की ओर से भोले बाबा और नाग देवता का अभिषेक और श्रृंगार किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, दूब आदि से स्नान कराया गया। देर शाम तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही।
मंदिर के महंत कृष्णा गिरी ने बताया कि अभिषेक की बुकिंग लोगों ने पहले ही करा ली थी। इसके साथ ही फोन पर भी श्रद्धालुओं ने अभिषेक किए। दिगंबर भरत गिरी ने बताया कि तमसा नदी में पानी के तेज बहाव की वजह से लोगों को इससे दूर रखा जा रहा था। सेवादल की ओर से लोग यहां खड़े होकर नजर बनाए हुए थे।
सेवादार मनमोहन जायसवाल ने बताया कि मंदिर की ओर से 16 अगस्त को निकाली जाने वाली शोभायात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। सहारनपुर चौक स्थित श्री पृथ्वीनाथ मंदिर में नाग पंचमी पर नाग देवता को पुष्प, फल, मिठाई आदि चढ़ाए गए। इस मौके पर श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर में नाग-नागिन के जोड़े चढ़ाए गए।
इस मौके पर 11 हजार मोतियों से महादेव का भव्य श्रृंगार किया गया, जो आकर्षण का केंद्र बना रहा। इसके साथ ही बेटी बचाने का संदेश दिया गया। कालिका माता मंदिर में नाग देवता का अभिषेक किया गया। पंचायती मंदिर में भोले बाबा और नाग देवता का पूजन किया गया। इसके साथ ही प्राचीन शिव मंदिर, प्राचीन दुर्गा मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर सभी जगह नाग देवता की पूजा-अर्चना की गई।
नागेश्वर मंदिर का विशेष महत्व
गढ़ी-डाकरा स्थित नागेश्वर मंदिर का विशेष महत्व है। हर बार नाग पंचमी में सैकड़ो श्रद्धालु यहां दूर-दूर से पूजन के लिए आते हैं। माना जाता है कि यहां पूजा करने पर नाग देवता की कृपा अवश्य बरसती है। नाग पंचमी पर यहां नाग देवता का विशेष अभिषेक किया गया। मंदिर के महंत विश्वनाथ योगी ने बताया कि सुबह चार बजे जब पूजा के लिए मंदिर के कपाट खोलते हैं तो अक्सर शिवलिंग पर नाग देवता लिपटे होते हैं। जो कि कपाट खुलते ही चुपचाप वहां से चले जाते हैं। बताया कि मंदिर में नागों का डेरा रहा है, तभी यहां का नाम नागेश्वर मंदिर पड़ा है। यहां नाग देवता की पूजा-अर्चना करने से फल अवश्य मिलता है।