पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी को सस्ते में डॉलर देने का लालच दिखाकर ठगने वाले गिरोह की चार महिलाओं समेत सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों में चार दिल्ली के रहने वाले हैं, दो हरियाणा और एक बिहार निवासी है। पुलिस का दावा है यह गिरोह पूरे देश में सक्रिय है और डॉलर बेचने के नाम पर ही ठगी करता है। गिरोह के सरगना समेत दो सदस्य फरार हैं। इनमें से एक दिल्ली और दूसरा मेरठ का रहने वाला है। इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
शनिवार को एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने पत्रकार वार्ता के दौरान इस घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 19 जून को दीवान सिंह बोरा (निवासी बदरी कॉलोनी) से कांवली रोड पर ठगों ने सस्ते डॉलर बेचने का लालच देकर दो लाख रुपये ठग लिए थे। उसके बाद पुलिस ने क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अपने मुखबिरों को सक्रिय किया। मुखबिरों से मिली सूचनाओं को जब एकत्र किया गया तो ठगों के बारे में पुख्ता जानकारी मिली। शनिवार को एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल और थानाध्यक्ष वसंत विहार हेमंत खंडूड़ी के नेतृत्व वाली टीम ने साधुराम इंटर कॉलेज के पास से दो पुरुष और दो महिलाओं को गिरफ्तार किया।
इसके अलावा एक टीम ने खुड़बुड़ा पुल के पास से एक पुरुष और दो महिलाओं को हिरासत में लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि इस गैंग का सरगना समीर मेरठ का रहने वाला है और हारून दिल्ली निवासी है। इन्होंने ही दीवान सिंह के साथ घटना को अंजाम दिया था। उसके बाद समीर और हारून गिरोह के अन्य सदस्यों को कुछ पैसे देकर फरार हो गए। एसएसपी ने बताया कि फरार दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। शनिवार को पकड़े गए सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
ये किए गए गिरफ्तार
1. मिथुन अंसारी निवासी औरंगाबाद, बिहार
2. रुबेल निवासी खटीक मोहल्ला, महेंद्रगढ़, जिला रासौर, हरियाणा
3. सानिया पत्नी समीर निवासी कनखन, मिततसपुर, मेरठ, हाल निवासी बवाना, जेजे कॉलोनी, दिल्ली
4. मैना पत्नी रुबेल निवासी खटीक मोहल्ला, महेंद्रगढ़, जिला रासौर, हरियाणा
5. रोयबिल निवासी जेजे कॉलोनी, दिल्ली
6. कुलसुम पत्नी हारून शेख निवासी बवाना जेजे कॉलोनी, दिल्ली
7. मर्जिना पत्नी रोयबिल जेजे कॉलोनी, दिल्ली
ये हैं फरार
1. हारून निवासी जेजे कॉलोनी दिल्ली
2. समीर उर्फ अल्ली निवासी मेरठ
हर जगह बताते हैं एक ही कहानी
ठग अलग-अलग जगहों पर घटनाओं को अंजाम देते हैं, लेकिन हर जगह एक ही कहानी बताते हैं। उससे लोगों को उन पर विश्वास हो जाता है। ठग बताते हैं कि उनकी चाची एक अंग्रेज के घर काम करती थी। अंग्रेज के परिवार में कोई नहीं था। इस बीच अंग्रेज की मौत हो गई तो वहां रखे डॉलर उन्होंने ले लिए। इन डॉलरों को वे चला नहीं सकते लिहाजा वह उन्हें सस्ते दाम पर बेच रहे हैं। इनमें से एकाध डॉलर उन्हें देकर जांच करने को कहते हैं। चूंकि, डॉलर असली होते हैं तो लोगों को आसानी से उन पर यकीन हो जाता है। उसके बाद एक बंडल थमाया जाता है। बंडल के दोनों तरफ डॉलर लगा होता है। जबकि अंदर कागज होते हैं।