गंगोत्री चैरिटेबिल अस्पताल में किडनी निकालने के काले धंधे में शामिल रहे किडनी माफिया डॉ.अमित समेत सात लोगों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हो गया है। इनमें ओमान के चार विदेशियों के अलावा बागपत का अस्पताल संचालक राजीव चौधरी भी शामिल है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि निकाली गई किडनी ओमान के शेख और उसके परिचित को ट्रांसप्लांट की गई है।
पकड़ा गया एजेंट जावेद खान तो मंगलवार को जेल चला गया, जबकि अन्य आरोपियों की धरपकड़ को पुलिस टीम कई राज्यों में छापेमारी कर रही है। डॉ.अमित वो ही किडनी चोर है, जिसने 2013 में गुरुग्राम में छह सौ से अधिक लोगाें की किडनी चुराने के खेल को अंजाम दिया था। आशंका यह भी है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यह लोग विदेश न भाग जाएं।
देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित गंगोत्री चैरिटेबिल अस्पताल में तीन-तीन लाख रुपये में किडनी खरीदने वाले गैंग में शामिल अधिकांश चेहरों से मंगलवार को नकाब उठ गया। इस खेल में डॉ.अमित राऊत के अलावा अस्पताल संचालक राजीव चौधरी उर्फ बली निवासी बागपत और डॉ.रक्षित उर्फ अक्षय के अलावा ओमान के शेख समेत चार लोग शामिल हैं। इन सातों लोगों के भारत छोड़ने की आशंका के मद्देनजर एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने मंगलवार को उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया।
क्या होता है लुक आउट नोटिस
महाराष्ट और गुजरात में नाम आने के बाद डॉ.अमित पहले भी नेपाल भाग गया था। चैरिटेबिल अस्पताल संचालक राजीव चौधरी भी दो साल से बागपत में नहीं है। उसके हरिद्वार में रहने की सूचना है। वहीं, ओमान के चार लोगों को भारत से बाहर जाने से रोकना इसलिए जरूरी है कि ताकि किडनी निकालने और ट्रांसप्लांट की पूरी कहानी साबित की जा सके।
एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि डॉ.अमित के साथ उसके बेटे रक्षित उर्फ अक्षय की भी तलाश है।
नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में उनकी गिरफ्तारी के बाद ही पता लग सकता है। डॉ.अमित ने मुंबई के जावेद खान की मदद से वेस्ट बंगाल से एक महिला समेत चार लोगों को किडनी बेचने कोे अस्पताल बुलाया था। दो की किडनी तो निकाल गई थी, मगर तय राशि का भुगतान न करने पर दो अन्य ने हंगामा कर दिया था। पुुलिस ने चार पीड़ितों को बचाकर सौदेबाजी करने वाले एजेंट जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया था।
उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपियों की धरपकड़ को टीमें यूपी, दिल्ली, गुरुग्राम भेजी गई हैं। पकड़े गए जावेद खान को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जबकि चार पीड़ितों का दून अस्पताल में मेडिकल कराया गया है। केस को मजबूत बनाने के पुलिस पीड़ितों के बुधवार को 164 के बयान दर्ज कराने की तैयारी में है।
क्या होता है लुक आउट नोटिस
किसी अपराध में आरोपी अथवा शक के दायरे में आया शख्स, जिसके विदेश भागने की आशंका रहती है, ऐसे लोगों को लुक आउट नोटिस जारी किया जाता है। विदेश भागने की आशंका जताते हुए संबंधित थाने द्वारा रिपोर्ट दी जाती है, जिस पर एसएसपी की तरफ से अस्थाई लुक आउट नोटिस जारी किया जाता है। नोटिस जारी होने के बाद एयरपोर्ट अथवा अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर उसकी निगरानी होती है। अस्थाई लुक आउट नोटिस 30 दिन का होता है। इस अवधि के बाद स्थाई लुक नोटिस जारी किया जाता है।