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अजन्मे बच्चों की रक्षा को खुद ढूंढ रहे रास्ते

Tue, 23 Jul 2013 08:31 AM IST
गंगा असनोड़ा थपलियाल
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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अजन्मे बच्चों की रक्षा के लिए क्षेत्र के लोग अब खुद ही रास्ते ढूंढने लगे हैं।
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किसी तरह आवाजाही के लिए खुली ब्रांच रूटों से समय से पहले ही श्रीनगर पहुंचकर केदार घाटी तथा अलकनंदा और पिंडर घाटी के लोगों ने अपने रिश्तेदारों के घर में शरण ले ली है। ताकि प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा सकुशल घर लौट सकें।

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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में न तो अभी सड़कें ठीक हैं और न ही अस्पतालों में डॉक्टर हैं। बदलते मौसम तथा क्षेत्र में आई आपदा के कहर से डरे-सहमे लोग अजन्मे बच्चों के लिए कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते। वह किसी तरह वाहनों की बुकिंग कर लंबे-लंबे रास्ते तय करके श्रीनगर तक पहुंच रहे हैं।
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बेस अस्पताल में गुप्तकाशी क्षेत्र की कई गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए पहुंची हैं, जो प्रसव के लिए यहां अपने रिश्तेदारों के घर पर ठहरी हुई हैं। ताकि उनका प्रसव सुरक्षित हो सके।

बेस अस्पताल में आपदा प्रभावित क्षेत्रों से यहां प्रसव को पहुंची सभी महिलाओं को सकुशल बचा लिया गया है। किसी को भी रेफर करने की जरूरत भी नहीं पड़ी है।
- डा. देवनंदा चौधरी, विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति विभाग

कई आपदा प्रभावित क्षेत्रों से यहां आकर गर्भवती महिलाओं ने चेकअप कराया है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से वे समय से पहले ही अपने रिश्तेदारों के घर पर श्रीनगर के आस-पास ही ठहरी हुई हैं।
- डा. अमिता, स्त्री रोग विशेषज्ञ बेस अस्पताल

पूर्ति ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म
श्रीनगर रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रपुर गांव की पूर्ति का विवाह दो वर्ष पूर्व ल्वाणी गांव के सुबोध चंद्र बगवाड़ी से हुआ था। सुबोध केदारनाथ में लॉज चलाते थे। सुबोध भीषण बाढ़ में लॉज के भीतर ही दब गए। रिश्तेदारों के बार-बार समझाने के बावजूद एक माह से पूर्ति ने ठीक से खाना तक नहीं खाया।

25 जुलाई की ड्यू डेट होने के बावजूद पूर्ति की ननद रेखा उसे पहले ही वाहन बुकिंग कराकर श्रीनगर ले आई। सोमवार को पूर्ति ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। खुशी का माहौल तो है लेकिन इस नन्हें मेहमान के आने पर इनके पिता की कमी सब को खल रही है। खुशी के साथ उनकी आंखों में सुबोध को खोने का गम भी है।
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सुरक्षित प्रसव के लिए हम वाहन बुकिंग करके पहले ही अपनी भाभी को श्रीनगर ले आए थे। मेरा भाई केदारनाथ में इस आपदा में चला गया। इसलिए उसके बच्चे तथा पत्नी को हम सुरक्षित चाहते थे।
- रेखा त्रिवेदी, केदारनाथ हादसे की चपेट में आए सुबोध बगवाड़ी की बहन

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