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तन्हाई ने कैप्टन को बनाया कवि, दुनिया भर में धूम

Mon, 15 Feb 2016 12:43 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला देहरादून
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मर्चेंट नेवी की ड्यूटी के दौरान की तन्हाई और समंदर की लहरों की हलचल ने मर्चेंट नेवी कैप्टन कुणाल को कवि बना दिया। उनकी कविताओं को देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब पसंद किया जा रहा है। फ्रेंच भाषा में अनुवाद के बाद उनकी अध्यात्म पर आधारित कविताओं का इटेलियन भाषा में अनुवाद किया जा रहा है। इस तरह सागर से निकली कविताएं संसार भर में फैल रह हैं।
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मूलरूप से उत्तराखंड में टिहरी के टिंगरी गांव और दून में सहस्त्रधारा रोड निवासी कुणाल ने 12वीं करने के बाद मर्चेंट नेवी की राह चुनी। समंदर की लहरों के बीच ड्यूटी चलती रही। नौकरी के दौरान की तन्हाइयों और समंदर की हलचल ने कुणाल को कवि बना दिया। उन्होंने अपने मन की बातों को कागज पर शब्दों में के रूप में अंकित कर दिया। देखते ही देखते कविताओं की संख्या बढ़ गई। कुणाल की कविताएं अध्यात्म पर आधारित हैं। उन्होंने अपनी कविताओं को पुस्तक का रूप दिया और ‘कुछ ख्वाब सागर से’ नाम से किताब प्रकाशित हुई।

इसके बाद कुणाल की कविताओं को प्रसिद्धि मिलने लगी। पांच नवंबर 2015 को इंटरनेशनल फिल्म एंड लिटरेरी फेस्टिवल में निर्देशक सुधीर मिश्रा ने उनकी कविताओं का संग्रह ‘अनआंसर्ड’ का विमोचन किया। दिसंबर 2015 में इन कविताओं का फ्रेंच अनुवाद फ्रांस के बुक स्टोर्स पर उपलब्ध हो गया। कुणाल ने बताया कि उन्होंने 23 जनवरी को एक करार किया है, जिसके तहत उनकी इस पुस्तक का इटेलियन भाषा में अनुवाद किया जाएगा।
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अंग्रेजी में उनकी एक और पुस्तक ‘स्पेरॉ इन द मिरर’ नाम से लंदन में पब्लिश हुई है। उसका हिंदी में अनुवाद ‘मैं कौन हूं’ नाम से बाजार में आने वाला है। कुणाल को हाल ही में इंडियन सिफरर च्वाइस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह मैरिटाइम के क्षेत्र में सबसे सम्मानित पुरस्कार है।
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