एक घंटे बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो सरकार ने हंगामे के बीच ही अपना सारा काम निबटा दिया। इस बीच, सरकार ने विभागवार बजट को बगैर चर्चा के ही पास करा दिया। विपक्ष ने किसी भी विभाग की अनुदान मांगाें पर कटौती का प्रस्ताव पेश नहीं किया।
विनियोग बिल भी बाद में बगैर चर्चा के पास हो गया। सरकार ने सोमवार को उत्तराखंड सेवानिवृत्ति लाभ विधेयक-2018, उत्तराखंड राज्य विधान सभा विविध संशोधन विधेयक 2018 और उत्तराखंड उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद अधिनियम 1965 संशोधन विधेयक 2018 को भी पारित करा दिया। वित्तीय प्रबंधन पर कैग की रिपोर्ट को भी सदन के पटल पर रखा गया। शोर शराबे के ही याचिका प्रस्तुत करने का काम भी हुआ।
हरक की टिप्पणी पर भड़के कांग्रेसी
लोकायुक्त बिल को लेकर हंगामा करने वाले कांग्रेस विधायक उस वक्त और भड़क गए, जब कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कांग्रेस पार्टी के लिए कुछ टिप्पणी कर दी। हालांकि हरक की टिप्पणी को बाद में स्पीकर ने सदन की कार्यवाही से हटाने के निर्देश जारी कर दिए। सत्ता पक्ष से प्रकाश पंत, मदन कौशिक, दलीप रावत, मुन्ना सिंह चौहान ने भी कांग्रेस पर जोरदार हमले किए। विपक्ष की कमान इंदिरा हृदयेश के अलावा प्रीतम सिंह, करण माहरा, काजी निजामुद्दीन के हाथ में रही।
बजट का हिसाब-किताब
45585
करोड़ का बजट 2018-19 के लिए हुआ पारित
30
अनुदान मांग सरकार की तरफ से की गई प्रस्तुत
लोकायुक्त बिल पहले से ही सदन की संपत्ति बन चुका है। विपक्ष को नैतिक हक नहीं है कि वह इस पर सवाल उठाए। पांच साल उनको मिले, उन्होंने क्या किया? हमने कहा है कि हम ऐसी सरकार चलाएंगे, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी। हम भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देंगे। भ्रष्टाचारियों को छोडे़ंगे नहीं।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस के दावे कर रही है, लेकिन लोकायुक्त बिल को लेकर चुप है। विजन डाक्युमेंट में 100 दिन के भीतर लोकायुक्त एक्ट बनाने की बात कही गई थी। अब सरकार इसकी बात नहीं कर रही है। साफ है लोकायुक्त बिल पर सरकार की मंशा साफ नहीं है।
- डॉ.इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष