उत्तराखंड में 22 महीने से रिक्त चल रही लोकायुक्त की कुर्सी पर अभी कोई उम्मीद मत कीजिए, क्योंकि सरकार केंद्र व दिल्ली प्रदेश के लोकायुक्त के बाद ही राज्य मे नियुक्ति करेगी।
यह तर्क वैसे तो किसी के गले उतरने वाला नहीं है, विधानसभा से पारित अपना कानून लागू है, दफ्तर और स्टाफ सब कुछ हैं, लेकिन अपने राज्य में भ्रष्टाचार पर चोट करने के लिए केंद्र व दिल्ली पर निर्भरता बताई जा रही है।
राज्यपाल भी दो पत्र भेजकर शासन को सचेत कर चुके, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई बाकी सारे काम हुए। पहले खंडूड़ी द्वारा लागू लोकायुक्त खत्म किया, अब अपने सुध नहीं और एक्ट में 180 दिन में नियुक्ति की बाध्यता को भी खत्म कर दिया।
23 अक्टूबर 2013 को लोकायुक्त के पद से जस्टिस एमएम घिल्डियाल के सेवा निवृत होने के बाद से ही यह कुर्सी खाली है। अखबरों की कतरनों व सामाजिक पहरेदारों को आधार बनाकर राज्यपाल ने विगत 19 फरवरी को सरकार को पत्र भेजकर लोकायुक्त नियुक्त को लेकर अद्यतन स्थिति जाननी चाही थी, लेकिन सरकार में कोई हरकत नहीं दिखी।
कुल मिलाकर सरकार अभी केंद्र व दिल्ली प्रदेश के जनलोकपाल की नियुक्ति को देखना चाहती है। इसके बाद ही प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति होगी। हालांकि सरकार का यह तर्क किसी के गले भी इसलिए नहीं उतर रहा है, क्योंकि यूपीए की कांग्रेसनीत सरकार का ही जनलोकपाल बिल राज्य में भी लागू है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार केंद्र केइस कानून पर भी आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।
प्रतिमाह लाखों रुपए खर्च
लोक सेवा आयोग से चयनित अफसरों के अलावा समूग ग घ श्रेणी के लगभग 35 कर्मचारियों की पगार, भवन किराया आदि मद में हर महीने 8-10 लाख रुपए खर्च होते। यह खर्च इसलिए भी व्यर्थ है कि लोकायुक्त के बगैर कोई काम नहीं हो रहा है।
लोकायुक्त कितना जरूरी है, इसका उदाहरण यूपी में देखा जा सकता है। 22 मंत्री की कुर्सी, दो विधायकों की सदस्यता गई, यूपीआरएनएन के सैकड़ों अभियंता आज भी जांच की आंच में झुलसे हैं, लेकिन अपने राज्य में ऐसे किसी भय का आगाज नहीं हो रहा है।
लोकायुक्त पर एक नजर
: भाजपा सरकार में अक्टूबर 2011 में विधानसभा से लोकायुक्त एक्ट पास हुआ
: इस एक्ट को 03 सितम्बर 2013 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी
: 09 सितम्बर 2013 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य को सूचना दी
: विधायी ने 24 सितम्बर 2013 को इसे प्रकाशन के लिए भेजा, सरकार ने रोक लगाई
: 17 नवम्बर 2013 को तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने सत्तारूढ़ दल के विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन तीन मंत्रियों समेत 16 विधायक नहीं आए। इस बैठक की खास बात यह थी उस समय हरीश गुट के विधायक नहीं आए
: बहुगुणा सरकार ने खंडूड़ी का लोकायुक्त निरस्त कर अपना लोकायुक्त बिल पास कराया जिसे राज्यपाल ने 26 फरवरी 2014 को मंजूरी दी
: 12 मई 2014 को लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए बीजापुर में हुई बैठक में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष, मुख्यमंत्री हरीश रावत, स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने एक विधिवेत्ता को सलेक्शन कमेटी में शामिल करने पर विचार विमर्श किया। सीएम ने लोकायुक्त की नियमावली तैयार करने को कहा। लेकिन उसकेबाद कुछ नहीं हुआ
हमने एक्सरसाइज पूरी कर ली है, लेकिन पहले हम दिल्ली के दोनों (नरेंद्र मोदी व अरविंद केजरीवाल) धुरंधरों को देखना चाहते हैं कि वे कैसा लोकपाल बनाते हैं, इसके बाद हम भी नियुक्ति कर देंगे।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री