उत्तराखंड में मुख्यमंत्री, विधायकों और कांग्रेस के पदाधिकारियों से संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक कराने के मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अपने ही जाल में फंसते दिखाई दे रहे हैं।
किशोर की मुहिम के अनुरूप मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के बजाय प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) को उपलब्ध करा दिया है। खुद किशोर ने भी यही किया है। लेकिन, किशोर इस ब्योरा को सार्वजनिक करने से हिचक रहे हैं।
रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया कर्मियों ने किशोर को पार्टी की पारदर्शिता की मुहिम की याद दिलाई। इस पर किशोर ने कहा कि उन्होंने और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध करा दिया है।
हालांकि, किशोर ने इस ब्योरा को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया और कहा कि समय आने पर इसे सार्वजनिक किया जाएगा। किशोर के मुताबिक विधायकों की संपत्ति का ब्योरा विधानसभा से मंगा लिया गया है।
हालांकि, विधानसभा के पास विधायकों की संपत्ति का ब्योरा तीन साल पुराना है। दूसरी तरफ अन्य किसी कांग्रेस पदाधिकारी ने अभी तक संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है।
यह था मामला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने मंत्रियों, विधायकों और कांग्रेस पदाधिकारियों को संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने को कहा था। इसके लिए किशोर ने उस समय करीब एक सप्ताह का समय कांग्रेस नेताओं को दिया था। जिसे मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद एक माह कर दिया गया था। लेकिन अब किशोर कह रहे हैं कि यह ब्योरा पीसीसी को दिया जा रहा है।
किशोर तब
- कांग्रेस के लिए पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। इसे देखते हुए कांग्रेस के मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारियों से कहा जाएगा कि एक सप्ताह में अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करें।
किशोर अब
- मुख्यमंत्री ने अपनी संपत्ति का ब्योरा पीसीसी को दे दिया है। विधायकों की संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा से मंगा लिया गया है। समय आने पर यह ब्यौरा सार्वजनिक भी कर दिया जाएगा।