लोक सभा चुनाव के दौरान प्रचार करना राजनीतिक दलों के लिए और भी मुश्किल होने जा रहा है।
आसान नहीं होगा मुकाबला
मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले तीन गुने बड़े क्षेत्र वाली संसदीय सीटों पर खराब सड़कों से कम समय में अधिक दूरी तय कर पाना आसान नहीं होगा। ऊपर से निर्वाचन आयोग ने भी संगदिली दिखाई है।
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हैलीकॉप्टर के प्रयोग को लेकर आयोग अब और सख्त हो गया है। फिर मौसम भी बेईमान है। जिस तरह से मौसम ने सारे अनुमान ध्वस्त किए हैं उससे यह कहना मुश्किल होता जा रहा है कि अप्रैल माह में बरसात नहीं होगी।
पिछले कुछ सालों से अप्रैल माह में तापमान 35 डिग्री सेंटीग्रेट के आसपास पहुंच रहा है। जाहिर है यह न तो नेताओं को रास आएगा और न ही मतदाताओं को।
इस बार हैलीकॉप्टर भी नहीं
पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों को पर्वतीय जिलों में प्रचार का पहिया आगे बढ़ाने के लिए हैलीकॉप्टर का अधिक सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में बड़े दल इसका खासा फायदा उठा भी लेते हैं।
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पर इस बार चुनाव आयोग ने हैलीकॉप्टर के प्रयोग को लेकर भी सख्त रवैया अपनाया हुआ है। ऐसे में राजनीतिक दलों को इस मामले में भी फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा।
मुसीबत यह है कि मौसम भी कम बेईमान साबित नहीं हो रहा है। बेमौसम बरसात मार्च माह में भी पुनर्निर्माण में लगी सरकार को परेशान किए हुए है। अप्रैल माह में भी मौसम का मिजाज बदल ही जाएगा यह कहना मुश्किल है।
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इतना तय है कि असमय बरसात हो सकती है या फिर गरमी सर चढ़ कर बोलेगी। दोनो ही स्थितियां प्रचार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। इस पर खराब संपर्क मार्ग और परेशान कर सकते हैं।
हाल यह है कि प्रदेश में अब भी दो हजार से ज्यादा संपर्क मार्ग सही हालत में नहीं हैं। ऐसे में नेताओं को अपने पांवों पर अधिक भरोसा करना पड़ सकता है।
पर परेशानी यह है कि पैदल चलना समय के लिहाज से फायदेमंद नहीं है। वह भी तब 15 हजार वर्ग किलोमीटर में मतदाता फैले हुए हों।
जल्द प्रचार अभियान शुरू करने वालों को फायदा
प्रचार अभियान की जल्द शुरूआत करने वालों को फायदा मिलेगा। इस हिसाब से कांग्रेस फिलहाल परेशानी में हैं। कांग्रेस अभी तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है।
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कांग्रेस के प्रचार में तेजी न आने से भाजपा की मुहिम भी पूरी तरह से गियर-अप नहीं हो पा रही है। बसपा, यूकेडी का भी यही हाल है। बसपा और यूकेडी अपने झगड़े से उबर नहीं पा रहे हैं तो प्रचार को आगे बढ़ाएंगे कैसे।
कौन सा क्षेत्र, कितना क्षेत्रफल
टिहरी गढ़वाल- 15770.58 वर्ग किलोमीटर
गढ़वाल- 14552.25 वर्ग किलोमीटर
अल्मोड़ा- 14536.61 वर्ग किलोमीटर
नैनीताल- 6526.33 वर्ग किलोमीटर
हरिद्वार- 2080.44 वर्ग किलोमीटर