28 वर्षों तक कांग्रेस का रहा दबदबा
आजादी के आंदोलन से प्रभावित रहे गढ़वाल के मतदाताओं में 28 वर्षों तक नेहरू-इंदिरा का जादू सिर चढ़कर बोला। उस समय कांग्रेस के बारे में यह कहावत बन गई कि गढ़वाल में उसकी जीत का सूरज शायद ही कभी डूबेगा।
खेमेबंदी और रामलहर में उजड़ गई सल्तनत
...लेकिन वक्त के साथ लोगों के मन से कांग्रेस का जादू उतरने लगा। 80 से 90 के दशक तक कांग्रेस की जड़े खेमेबंदी और आंतरिक विद्रोह से हिलने लगी। 90 के दशक में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की लहर में कांग्रेस के किले की दीवारें दरकने लगी। 21वीं सदी में आने के साथ ही कांग्रेस का किला खंडहर में तब्दील हो गया।
अर्श से फर्श पर आ गई कांग्रेस
कांग्रेस के अर्श से फर्श पर गिरने की तस्दीक दो चुनावों के वोट प्रतिशत के अंतर से हो जाती हैं। इस सीट पर सर्वाधिक प्रतिशत में वोट लेने का रिकार्ड कांग्रेस के प्रताप सिंह के नाम है। 1971 में चुनाव जीते प्रताप सिंह ने तब 79.24 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, लेकिन 2019 का चुनाव आते-आते कांग्रेस का यह वोट प्रतिशत गिर कर 27.31 प्रतिशत रह गया। 51.93 फीसदी की यह गिरावट गढ़वाल सीट पर कांग्रेस पराभव की कहानी है।
व्यक्तिगत दमखम भी मायने रखेगा
संसाधन, सांगठनिक नेटवर्क और पिछले दो चुनाव के परिणामों के मामले में कांग्रेस से भाजपा इक्कीस है। ऐसे में गढ़वाल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल का व्यक्तिगत दमखम मायने रखेगा। वह श्रीनगर गढ़वाल सीट पर करीबी अंतर से चुनाव हारे थे। परीक्षा भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी की भी होगी, क्योंकि उनका भी यह पहला लोस चुनाव है। उनके पास मजबूत सांगठनिक नेटवर्क, पार्टी कार्यकर्ताओं की लंबी फौज, पीएम मोदी का समर्थन, राज्यसभा में कराए गए कार्य हैं, जिनके दम पर वह चुनाव लड़ेंगे। साथ ही राज्यसभा का सदस्य होने का एक अनुभव है। इस भूमिका में रह कर उन्होंने जो काम किए, उन्हें जनता के बीच रखने का भी वह प्रयास करेंगे।
लोस सीट पर कब कौन किस पार्टी का रहा विजेता
आम चुनाव विजेता
1951-52 भक्त दर्शन (कांग्रेस)
1957 भक्त दर्शन (कांग्रेस)
1962 भक्त दर्शन (कांग्रेस)
1967 भक्त दर्शन (कांग्रेस)
1971 प्रताप सिंह (कांग्रेस)
1977 जगन्नाथ शर्मा (कांग्रेस)
1980 हेमवती नंदन बहुगुणा (कांग्रेस) आई
1984 चंद्रमोहन सिंह नेगी (कांग्रेस)
1989 चंद्रमोहन सिंह नेगी (जनता दल)
1991 भुवनचंद खंडूड़ी (भाजपा)
1996 सतपाल महाराज एआईसी (तिवारी)
1998 भुवन चंद खंडूड़ी (भाजपा)
1999 भुवन चंद खंडूड़ी (भाजपा)
2004 भुवन चंद खंडूड़ी (भाजपा)
2009 सतपाल महाराज (भाजपा)
2014 भुवन चंद खंडूड़ी (भाजपा)
2019 तीरथ सिंह रावत (भाजपा)
रोचक बातें
- 17 आम चुनाव में कांग्रेस सबसे ज्यादा बार जीती
- 09 आम चुनाव कांग्रेस के नाम रहे गढ़वाल सीट पर
- 06 आम चुनाव जीते भाजपा ने संसदीय सीट पर
- 05 बार संसदीय सीट से चुनाव जीते भाजपा के बीसी खंडूड़ी
- 04 बार लगातार जीत दर्ज करने का रिकार्ड कांग्रेस भक्त दर्शन के नाम
- 03 बार चुनाव जीते चंद्रमोहन सिंह नेगी इस सीट पर
- 02 बार सांसद रहे गढ़वाल सीट से सतपाल महाराज
- 02 बार हेमवती नंद बहुगुणा जीते, एक जीत उपचुनाव में मिली
परिणाम -2019
भाजपा कांग्रेस
तीरथ सिंह रावत मनीष खंडूड़ी
5,06,980 (67.78%) 204311 (27.31%)
परिणाम 2014
भाजपा प्रतिशत कांग्रेस
मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी हरक सिंह रावत
405690 (59.31% ) 22164 (32.33)
अन्य दल और निर्दलीय 08.36
परिणाम-2009
कांग्रेस भाजपा
सतपाल महाराज लेफ्टिनेंटस जनरल टीपीएस रावत
236949 (44.41%) 219552 (41.35%)
परिणाम-2004
भाजपा कांग्रेस
मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी ले.जनरल टीपीएस रावत
257726 (51.21%) 206764 (41.08%)
भौगोलिक रूप से कठिन
17,820 वर्ग किमी में फैली गढ़वाल सीट भौगोलिक रूप से कठिन है। संसदीय सीट में कुल 14 विधानसभाएं हैं, जिनमें पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिले की सीटों के अलावा नैनीताल की रामनगर और टिहरी की नरेंद्रनगर और देवप्रयाग सीट शामिल है। इसमें चमोली का सीमांत क्षेत्र नीति माणा, केदारघाटी का उच्च हिमालयी क्षेत्र, पौड़ी का यमकेश्वर और कोटद्वार क्षेत्र शामिल है।
जातीय समीकरण
सैनिक बहुल गढ़वाल लोस सीट पर 46 प्रतिशत ठाकुर, 26 प्रतिशत ब्राह्मण, आठ प्रतिशत अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति और बाकी अन्य जातियां हैं।
गढ़वाल सीट पर मतदाता
- 13,69,388 कुल सामान्य मतदाता
- 6,99,408 पुरुष मतदाता
- 6,69,964 महिला मतदाता
- 36,845 सर्विस मतदाता