1971 में कांग्रेस के प्रताप सिंह ने पौड़ी संसदीय सीट पर यह करिश्मा दोहराया और 79.24 प्रतिशत वोट हासिल कर सबका बोरिया बिस्तर बांध दिया। 1984 में अल्मोड़ा सीट पर कांग्रेस के हरीश रावत ने 61.26 फीसदी वोट लेकर भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य विरोधियों की जमानत जब्त करवा दी।
1998 के आम चुनाव में टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे मानवेंद्र शाह 51.82 फीसदी वोट लेकर एकतरफा जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषक अनूप नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड बनने से पहले 13 और बनने के बाद तीन लोकसभा चुनाव हुए हैं। इसके अलावा कई उपचुनाव हुए हैं। लेकिन पांच बार ही प्रत्याशी एकतरफा जीत हासिल करने में कामयाब हुए हैं।
क्या है जमानत जब्त होना
प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए कुल मतदान का 16.66 फीसदी (1/6 हिस्सा) वोट प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसका मतलब है कि किसी प्रत्याशी को अगर कुल मतदान के 16.66 फीसदी (1/6 हिस्सा) वोट नहीं मिलते तो नामांकन के समय जमा की गई राशि को जब्त कर लिया जाता है। इसे ही जमानत जब्त होना कहते हैं।
वर्ष लोकसभा विजेता व दल प्राप्त मत कुल प्रत्याशी
1998 टिहरी मानवेंद्र शाह (भाजपा) 51.82 09
1984 अल्मोड़ा हरीश रावत(कांग्रेस) 61.26 08
1971 पौड़ी प्रताप सिंह (कांग्रेस) 79.24 03
1957 टिहरी मानवेंद्र शाह (कांग्रेस) 78. 89 03
1951 देहरादून महावीर त्यागी (कांग्रेस) 63.75 04
* सभी आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिये हैं।