उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) को कुर्सी चुनाव चिह्न वापस मिल गया है। निर्वाचन आयोग में पैरवी करने के बाद यूकेडी को ये कामयाबी मिली है। अब लोकसभा चुनाव में यूकेडी प्रत्याशियों को कुर्सी चुनाव चिह्न ही आवंटित होगा।
वर्ष 2012 से पहले उत्तराखंड क्रांति दल में विघटन होने के कारण निर्वाचन आयोग ने कुर्सी चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था। त्रिवेंद्र पंवार और दिवाकर भट्ट गुट में पार्टी दो धड़ों में विभाजित हो गई थी। प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का चुनाव निशान फ्रीज होने से त्रिवेंद्र पंवार गुट को कप प्लेट और दिवाकर गुट को कटी पंतग चुनाव चिह्न मिला था। 2017 के विधानसभा चुनाव में पुष्पेश त्रिपाठी नेतृत्व वाली उत्तराखंड क्रांति दल को निर्वाचन आयोग ने कुर्सी चुनाव चिह्न आवंटित किया, लेकिन निकाय चुनाव में चिन्ह के लिए समय पर आवेदन न करने के कारण राज्य निर्वाचन आयोग ने पार्टी को कुर्सी निशान नहीं दिया।
लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की ओर से निर्वाचन आयोग में लगातार पैरवी की गई। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने यूकेडी को कुर्सी चुनाव चिह्न आवंटित किया है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। यूकेडी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पंकज व्यास का कहना है कि लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों पर चुनाव पार्टी के निशान पर लड़ा जाएगा। निर्वाचन आयोग से कुर्सी चुनाव चिह्न की अनुमति मिल गई है।