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लोकसभा चुनाव 2019: ‘चौकीदार’ पर सियासत, असल चौकीदार बेबस, पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट

Wed, 20 Mar 2019 02:52 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लोकसभा चुनाव में सियासत का केंद्र बिंदु ‘चौकीदार’ पर सिमटकर रह गया है। कांग्रेस और अन्य दल प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर है के नारे के साथ घेर रहे हैं। वहीं, भाजपा कार्यकर्ता ‘मैं हूं चौकीदार’ के नारे से जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर मुहिम चला रहे हैं। पक्ष और विपक्ष के बीच चौकीदार शब्द सियासत को गरमा रहा है, लेकिन वास्तविक चौकीदारों की हालत खस्ताहाल है।

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बेहतर जिंदगी के लिए पूरी उम्र संघर्ष में ही खप जाती है। जो मेहनताना मिलता है, उससे किसी तरह परिवार का गुजर बसर ही हो पाता है। हालांकि, चौकीदारों को प्रधानमंत्री का खुद को चौकीदार कहना अच्छा लगा और उतना ही बुरा चौकीदार चोर है सुनना भी। दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में ‘चाय वाला’ भी प्रचार के फोकस में रहा था। प्रधानमंत्री मोदी ने तब खुद को चाय बेचने वाला बताया था और भाजपा ने इसे भुनाया था।

पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं

इस लोकसभा चुनाव में प्रचार में चौकीदार शब्द के हथियार से पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं। कांग्रेस लगातार ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दे रही है तो भाजपा भी जवाब में ‘मैं भी चौकीदार’ नारा दे रही है।

प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के मुख्यमंत्री, नेता और कार्यकर्ता ट्विटर प्रोफाइल में नाम से पहले चौकीदार शब्द जोड़ रहे हैं, लेकिन सियासत के इतर असल चौकीदार जिंदगी का हिस्सा बन चुकी चौकीदारी के कार्य में व्यस्त हैं। रुद्रपुर के कुछ इलाकों में चौकीदारी का काम कर रहे लोगों से बातचीत की गई तो उनके जेहन में छिपा दर्द जुबां पर आ गया। वे बोले कि नेता चाहे कुछ भी बोले, लेकिन उनको तो चौकीदारी का काम ही करना है।

ये है हकीकत

सब्जी मंडी में बबूरा रामपुर के रहने वाले सोनू मिश्रा चौकीदारी में मुस्तैद रहते हैं। सोनू 10 साल से चौकीदारी कर रहे हैं। कहते हैं कि नेता खुद को चौकीदार बताकर उनका मजाक उड़ा रहे हैं। वे जीवन में रोजीरोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दुकानदार आपस में रुपये एकत्र कर उनको देते हैं, तब जाकर घर का खर्च बमुश्किल चल पाता है। 

सब्जी मंडी कपड़ा मार्केट में ड्यूटी पर चौकस रामबहादुर बजा पियान नेपाल के रहने वाले हैं और पांच साल से चौकीदारी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कम से कम प्रधानमंत्री ने खुद को चौकीदार बोला तो अच्छा लगा, लेकिन इससे सिर्फ नेताओं की सियासत चमकेगी। हम जैसों का भला क्या होगा। चौकीदार की स्थिति तो हमेशा भुखमरी वाली रहती है। 
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आठ साल से चौकीदारी कर रहे हैं चमन

मुख्य बाजार में चौकीदारी करने वाले चमन बहादुर महेंद्रनगर (नेपाल) निवासी हैं और आठ साल से चौकीदारी कर रहे हैं। कहते हैं कि नेता चौकीदार शब्द का सहारा लेकर नेतागीरी चमका रहे हैं। कुछ तो चौकीदार को चोर भी कह रहे हैं तो उन्हें अच्छा नहीं लग रहा। कोई चोर कहे या कुछ और हमें तो साहब यही काम करना है।
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